तमिलनाडु में बगावत पर AIADMK की बड़ी कार्रवाई, 29 नेताओं से छीने गए पार्टी पद

तमिलनाडु की राजनीति में जारी उठापटक के बीच एआईएडीएमके ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाया है। पार्टी प्रमुख ई. पलानीस्वामी ने बगावत करने वाले नेताओं पर सख्त कार्रवाई करते हुए 29 नेताओं को उनके पदों से हटा दिया है। इस कार्रवाई में एसपी वेलुमणि और सी. वे. षणमुगम जैसे कई बड़े नाम भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि यह फैसला हाल ही में विधानसभा में हुए विश्वास मत के दौरान टीवीके सरकार को समर्थन देने के बाद लिया गया है।

दरअसल, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार ने विधानसभा में बहुमत परीक्षण के दौरान जीत हासिल की थी। इस दौरान एआईएडीएमके के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर विजय सरकार के पक्ष में मतदान किया था, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व नाराज चल रहा था। अब इसी घटनाक्रम के बाद पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए कई नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटा दिया है।

बागी नेताओं ने नकारा पार्टी में टूट का दावा

एआईएडीएमके के बागी गुट का नेतृत्व कर रहे सी. वे. षणमुगम ने इससे पहले पार्टी में किसी भी प्रकार की टूट से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी अभी भी एकजुट है और संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए जल्द से जल्द आम परिषद की बैठक बुलानी चाहिए।

हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने उनके इस बयान के बावजूद सख्त रुख अपनाया। कार्रवाई के बाद षणमुगम ने पलानीस्वामी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने कोई विश्वासघात नहीं किया है। उनके मुताबिक, एआईएडीएमके का मूल उद्देश्य हमेशा से डीएमके का विरोध करना रहा है और पिछले कई दशकों से पार्टी उसी विचारधारा पर आगे बढ़ती रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा में पार्टी नेतृत्व अपने मूल सिद्धांतों से भटक गया है। षणमुगम ने कहा कि पार्टी के मूल एजेंडे को नजरअंदाज कर व्यक्तिगत राजनीति को प्राथमिकता दी जा रही है।
विश्वास मत में विजय सरकार को मिला बड़ा समर्थन

बुधवार को हुए फ्लोर टेस्ट में मुख्यमंत्री विजय की सरकार ने 144 विधायकों का समर्थन हासिल कर बहुमत साबित कर दिया था। सरकार को बहुमत के लिए केवल 118 विधायकों की जरूरत थी, लेकिन अपेक्षा से कहीं अधिक समर्थन मिलने से विजय की स्थिति और मजबूत हो गई।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, एआईएडीएमके के करीब 25 विधायकों ने पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ जाकर टीवीके सरकार के समर्थन में मतदान किया। इन विधायकों की भूमिका को बहुमत परीक्षण में निर्णायक माना जा रहा है।

टीवीके और एआईएडीएमके के बीच वैचारिक समानता का दावा


सी. वे. षणमुगम ने टीवीके सरकार को समर्थन देने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि उनकी पार्टी और विजय की टीवीके कई मुद्दों पर समान विचारधारा रखती हैं। उन्होंने दावा किया कि दोनों दल डीएमके को राज्य की राजनीति में “नकारात्मक शक्ति” मानते हैं और इसी वजह से कई विधायकों ने विश्वास मत के दौरान विजय सरकार का साथ दिया।

षणमुगम का कहना था कि यह समर्थन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि वैचारिक समानता के आधार पर दिया गया था। हालांकि एआईएडीएमके नेतृत्व ने इसे पार्टी अनुशासन का उल्लंघन मानते हुए कड़ा संदेश देने का फैसला किया।

तमिलनाडु की राजनीति में इस घटनाक्रम को आने वाले समय के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले का असर न केवल एआईएडीएमके के संगठनात्मक ढांचे पर पड़ेगा, बल्कि राज्य की विपक्षी राजनीति में भी नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।