जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए मनरेगा के स्थान पर प्रस्तावित वीबी-जी राम जी योजना के वित्तीय ढांचे को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि जब इस नई योजना के फंडिंग पैटर्न और इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर भाजपा शासित राज्यों ने ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, तब राजस्थान सरकार प्रदेशवासियों के सामने वास्तविक स्थिति क्यों नहीं रख रही है? उन्होंने पूछा कि सरकार यह स्पष्ट करे कि वह ऐसे मॉडल का समर्थन किस आधार पर कर रही है, जिसकी वित्तीय व्यवहार्यता पर उसकी अपनी पार्टी की राज्य सरकारें भी चिंता व्यक्त कर रही हैं।
टीकाराम जूली ने कहा कि सामने आई जानकारी के अनुसार भाजपा शासित बिहार और मध्य प्रदेश सहित झारखंड ने इस योजना के फंडिंग पैटर्न पर आपत्ति दर्ज कराई है। इन राज्यों का कहना है कि योजना में राज्यों के हिस्से के रूप में निर्धारित 40 प्रतिशत अंतरिम वित्तीय आवंटन पर्याप्त नहीं है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी को प्रभावी ढंग से लागू करना बेहद कठिन होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि जब उनकी ही पार्टी के राज्य इस व्यवस्था को आर्थिक रूप से अव्यावहारिक बता रहे हैं, तब राजस्थान सरकार का इस मुद्दे पर क्या रुख है? क्या सरकार प्रदेश की जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने वाले इस प्रस्ताव का समर्थन कर रही है, या फिर वह इन आपत्तियों के समाधान की दिशा में कोई पहल करेगी?
सर्वोदय की भावना से जन्मी मनरेगा, कोविड संकट में बनी करोड़ों परिवारों का सहारानेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मनरेगा केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण का मजबूत आधार रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 'सर्वोदय' के विचार से प्रेरित होकर इस कानून को लागू किया था, जिसका उद्देश्य गांवों में सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
टीकाराम जूली ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जब देशभर में आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई थीं और लाखों लोगों का शहरी रोजगार समाप्त हो गया था, तब मनरेगा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। करोड़ों परिवारों की आजीविका इसी योजना के माध्यम से चलती रही और गांवों में आर्थिक गतिविधियों का पहिया घूमता रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से सफल और प्रभावी साबित हो चुकी इस योजना को केवल नाम बदलने और राजनीतिक श्रेय लेने की मानसिकता के कारण समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है, जो ग्रामीण भारत के हितों के खिलाफ है।
कांग्रेस सरकार पहले ही बढ़ा चुकी थी 125 दिनों का रोजगारटीकाराम जूली ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने हमेशा घोषणाओं से अधिक काम को प्राथमिकता दी है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2022-23 के बजट में ही प्रदेश के गरीब एवं ग्रामीण परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से मनरेगा के तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने का निर्णय लिया था। यह फैसला बिना किसी अनावश्यक प्रचार-प्रसार के केवल जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान राज्य सरकार केंद्र की अधूरी और व्यवहारिक चुनौतियों से घिरी योजनाओं का बिना समुचित मूल्यांकन किए अनुसरण कर रही है। इसका सीधा असर भविष्य में राजस्थान के ग्रामीण मजदूरों और राज्य के वित्तीय संसाधनों पर पड़ सकता है। टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार को बड़े-बड़े प्रचार अभियानों के बजाय पहले यह बताना चाहिए कि उसकी अपनी पार्टी के राज्यों द्वारा उठाई गई तकनीकी और आर्थिक आपत्तियों का समाधान क्या है। साथ ही प्रदेश की जनता को यह भरोसा भी दिलाना चाहिए कि नई व्यवस्था से न तो रोजगार प्रभावित होगा और न ही राज्य पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ेगा।