SC-ST वर्ग की सुरक्षा और सम्मान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, अत्याचार के मामलों में आई उल्लेखनीय कमी: CM भजनलाल शर्मा

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लोगों को सुरक्षित, सम्मानजनक और न्यायपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बीते ढाई वर्षों में सरकार द्वारा उठाए गए प्रभावी कदमों का सकारात्मक असर देखने को मिला है और इसी का परिणाम है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के खिलाफ दर्ज होने वाले अत्याचार के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2025 में ऐसे मामलों में लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट आई है।

मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के खिलाफ अपराध करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, समाज में सामाजिक समरसता, भाईचारा और सद्भाव का वातावरण मजबूत करने में योगदान देने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी ठोस प्रयास किए जाएं।

128 दिनों से घटकर 53 दिन हुआ मामलों के निस्तारण का औसत समय

मुख्यमंत्री ने बैठक में बताया कि वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 के दौरान एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में 15.88 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं, वर्ष 2025 के पहले छह महीनों की तुलना में वर्ष 2026 की समान अवधि में भी ऐसे मामलों में 15.49 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है।

उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के निस्तारण में भी पहले की तुलना में काफी तेजी आई है। वर्ष 2023 में जहां केवल 35.16 प्रतिशत मामलों का निस्तारण 60 दिनों के भीतर हो रहा था, वहीं वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 47 प्रतिशत पहुंच गया। जुलाई 2026 तक यह बढ़कर 67.88 प्रतिशत हो चुका है। इसी तरह मामलों के निस्तारण का औसत समय भी 128 दिनों से घटकर केवल 53 दिन रह गया है। उन्होंने बताया कि जिन मामलों में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगाई जाती है, उनमें पहले 10 प्रतिशत रैंडम सत्यापन किया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां एक ओर अत्याचार के मामलों में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर समयबद्ध जांच और निस्तारण की प्रक्रिया भी पहले से कहीं अधिक प्रभावी हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य के 45 पुलिस जिलों में एससी-एसटी सेल स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि शेष छह जिलों में भी जल्द ही ऐसे सेल शुरू किए जाएंगे। उन्होंने पुलिस और अभियोजन विभाग को निर्देश दिए कि दोष सिद्धि की दर बढ़ाने के लिए बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जाए।
जिला और पंचायत स्तर पर नियमित हों निगरानी समिति की बैठकें

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने और समुदायों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से जिला एवं उपखंड स्तर पर निगरानी एवं सतर्कता समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं। इसके साथ ही वर्ष में कम से कम दो बार पंचायत स्तर पर भी ऐसी बैठकों का आयोजन सुनिश्चित किया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समय रहते समाधान किया जा सके।

पीड़ितों को समय पर मिले आर्थिक सहायता और न्याय


मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि एससी-एसटी अत्याचार से जुड़े सभी दर्ज मामलों की लगातार निगरानी की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। संवेदनशील मामलों की जांच पूरी गंभीरता और तेजी से पूरी हो तथा एफआईआर दर्ज होने से लेकर न्यायालय में अंतिम निर्णय तक पीड़ितों को अधिनियम के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए।

बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, पीड़ितों को राहत एवं सहायता, लंबित मामलों के निस्तारण तथा कानून के समयबद्ध पालन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने सरकार द्वारा दर्ज एफआईआर, अनुसंधान की अवधि, समय पर चालान प्रस्तुत करने, पीड़ित परिवारों को दी गई आर्थिक सहायता और विभिन्न प्रावधानों के क्रियान्वयन की प्रगति से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। साथ ही सहायता पोर्टल, पिछले तीन वर्षों में वितरित आर्थिक सहायता तथा लंबित मामलों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

लंबित मामलों के त्वरित समाधान और बेहतर समन्वय पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सहायता से जुड़े लंबित मामलों की थाना और जिला स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर राहत मिल सके। उन्होंने संस्थागत शिकायत निवारण प्रणाली के तहत हेल्पलाइन, हेल्पडेस्क और ऑनलाइन पोर्टलों पर प्राप्त शिकायतों की रियल टाइम मॉनिटरिंग और त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। साथ ही राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का शीघ्र निस्तारण करने पर विशेष जोर दिया।

बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा अभियोजन विभाग के अधिकारियों को संवेदनशीलता और बेहतर समन्वय के साथ कार्य करना चाहिए, ताकि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों को समय पर न्याय, सुरक्षा और उनके अधिकारों का प्रभावी संरक्षण मिल सके।

इस बैठक में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, राज्य स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति के सदस्य जोगेश्वर गर्ग और फूल सिंह मीणा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के प्रतिनिधियों सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।