'10 करोड़ लेने का आरोप साबित करें', रमेश मीणा ने गहलोत को दी नार्को टेस्ट की खुली चुनौती

राजस्थान की राजनीति में वर्ष 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मंत्री रमेश मीणा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास यह प्रमाण है कि उन्होंने कांग्रेस सरकार के खिलाफ कथित साजिश के दौरान 10 करोड़ रुपये लिए थे, तो उनका नार्को टेस्ट कराया जाए। रमेश मीणा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं और सच सामने आने से उन्हें कोई डर नहीं है।

दरअसल, गहलोत खेमे की ओर से लंबे समय से यह आरोप लगाया जाता रहा है कि वर्ष 2020 में कांग्रेस सरकार के खिलाफ खड़े हुए कुछ विधायकों ने सरकार गिराने की कथित कोशिश के तहत करोड़ों रुपये की अग्रिम राशि ली थी। इन्हीं आरोपों के केंद्र में कई बार रमेश मीणा का नाम भी सामने आता रहा है। अब उन्होंने इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सीधे अशोक गहलोत को चुनौती दे डाली है।

करौली जिले में आयोजित एक किसान सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में रमेश मीणा ने कहा कि बार-बार एक ही आरोप दोहराने से वह सच नहीं बन जाता। उन्होंने कहा कि जब भी कांग्रेस को राजनीतिक रूप से लाभ मिलने की संभावना दिखाई देती है, तब ऐसे पुराने आरोपों को फिर से उछाल दिया जाता है। उनके अनुसार, यह एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

सभा में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए मीणा ने कहा, मैं अशोक गहलोत जी को खुली चुनौती देता हूं कि मेरा नार्को टेस्ट करवा लें। अगर यह साबित हो जाए कि मैंने 10 करोड़ रुपये लिए थे, तो मैं हर तरह की कार्रवाई का सामना करने को तैयार हूं। लेकिन जांच सिर्फ मेरी ही नहीं होनी चाहिए। गहलोत जी का भी नार्को टेस्ट होना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने निर्दलीय विधायकों, बीटीपी के विधायकों और भाजपा के कुछ नेताओं को समर्थन जुटाने के लिए क्या-क्या किया था।

रमेश मीणा ने दावा किया कि उनके पास कुछ ऐसे दस्तावेज भी मौजूद हैं जो उस दौर की राजनीतिक गतिविधियों पर कई सवाल खड़े करते हैं। हालांकि उन्होंने उन दस्तावेजों का सार्वजनिक रूप से कोई विवरण नहीं दिया, लेकिन संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो वह उन्हें सामने लाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

पूर्व मंत्री ने कांग्रेस नेतृत्व और विशेष रूप से राहुल गांधी को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पार्टी को ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए जो गलत सूचनाएं देकर नेतृत्व को भ्रमित करते हैं। मीणा ने राहुल गांधी से आग्रह किया कि वे जमीनी स्तर पर काम करने वाले ईमानदार और समर्पित कार्यकर्ताओं पर भरोसा करें, न कि उन लोगों पर जो केवल राजनीतिक लाभ के लिए सलाह देते हैं।

उन्होंने अशोक गहलोत के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस ने उन्हें तीन बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर दिया, लेकिन इसके बावजूद पार्टी को कई महत्वपूर्ण चुनावों में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। उनके अनुसार, पार्टी को अब आत्ममंथन करने की जरूरत है और लगातार हार के कारणों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
गौरतलब है कि राजस्थान की राजनीति में वर्ष 2020 का घटनाक्रम आज भी सबसे चर्चित राजनीतिक संकटों में गिना जाता है। उस समय तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों ने अशोक गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस सरकार को गंभीर संकट में डाल दिया था और कई सप्ताह तक राजनीतिक अस्थिरता बनी रही थी।

उस दौर में सचिन पायलट खेमे के कई विधायक दिल्ली और हरियाणा में डेरा डाले हुए थे। पार्टी नेतृत्व को स्थिति संभालने के लिए सक्रिय हस्तक्षेप करना पड़ा था। अंततः कांग्रेस आलाकमान की मध्यस्थता के बाद मामला शांत हुआ और सरकार बच गई। हालांकि इस पूरे विवाद का असर लंबे समय तक राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में दिखाई देता रहा।

राजनीतिक संकट के बाद सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री पद और राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी से हटा दिया गया था। वहीं, उनके समर्थन में खड़े कई नेताओं और विधायकों को भी पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ा। रमेश मीणा उन विधायकों में शामिल थे जिन्होंने उस समय गहलोत नेतृत्व के खिलाफ खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

इसी वजह से गहलोत समर्थक खेमे की ओर से समय-समय पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि पायलट गुट के कुछ नेताओं को सरकार अस्थिर करने के प्रयास के बदले आर्थिक लाभ का प्रस्ताव दिया गया था। रमेश मीणा लगातार इन आरोपों को निराधार बताते रहे हैं। अब उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए नार्को टेस्ट की चुनौती देकर इस पूरे विवाद को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

राजस्थान में आगामी चुनावी समीकरणों और कांग्रेस के अंदरूनी हालात के बीच रमेश मीणा का यह बयान नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और गहलोत खेमे की प्रतिक्रिया पर भी सभी की नजरें बनी रहेंगी।