राजस्थान: यूट्यूबर को फर्जी केस में फंसाकर 1 लाख की वसूली, SHO सहित 4 पुलिसकर्मी निलंबित

कोटपूतली जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाबरू थाना क्षेत्र में कुछ पुलिसकर्मियों पर एक यूट्यूबर को फर्जी केस में फंसाकर पैसे वसूलने के आरोप लगे हैं। इस घटना के उजागर होते ही विभाग में हलचल मच गई और तत्काल कार्रवाई करते हुए SHO समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।

फर्जी आर्म्स एक्ट केस की साजिश

जानकारी के अनुसार, पीड़ित यूट्यूबर को उसके ही एक परिचित ने पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर जाल में फंसाया। योजना के तहत उसकी कार में नकली पिस्टल रख दी गई और उसे आर्म्स एक्ट के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई। पहले उससे 5 लाख रुपये की मांग की गई, लेकिन बाद में 1 लाख रुपये लेकर मामला ‘सेटल’ कर दिया गया।

धमकाकर की गई वसूली, पुलिस पर लगे गंभीर आरोप

मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पीड़ित के मुताबिक, उसका दोस्त पवन छाबड़ी उसे बहाने से कोटपूतली लेकर आया और भाबरू पुलिया के पास कार रुकवाई। वहां पहले से मौजूद पुलिसकर्मियों ने गाड़ी की तलाशी ली और डिग्गी से कथित पिस्टल निकालकर उसे जेल भेजने की धमकी दी। डर के माहौल में उससे मोटी रकम की मांग की गई, जिसे बाद में कम कर 1 लाख रुपये कर दिया गया।
SHO समेत चार पुलिसकर्मी सस्पेंड

जैसे ही यह मामला उजागर हुआ, प्रशासन ने तुरंत सख्त कदम उठाए। भाबरू थाने के SHO रामकिशोर, ASI रामरतन और दो कांस्टेबल—सुभाष और लक्ष्मण—को निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।

जांच में सामने आया पूरा सच

घटना के बाद पीड़ित को अपने दोस्त पर शक हुआ, जिसके बाद उसने सबूत इकट्ठा कर कोटपूतली एसपी से शिकायत की। जांच में आरोप सही पाए गए, जिससे पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद साजिश में शामिल पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई।

जयपुर रेंज के आईजी राहुल प्रकाश ने SHO रामकिशोर की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर उन्हें भी निलंबित कर दिया। फिलहाल इस पूरे मामले की विस्तृत जांच नाजिम अली को सौंपी गई है, जो हर पहलू से मामले की पड़ताल कर रहे हैं।

इस घटना ने एक बार फिर कानून व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर जांच के नतीजों पर टिकी है, जिससे साफ हो सकेगा कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन शामिल था।