जयपुर: राजस्थान में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार गंभीर होता जा रहा है। प्रदेश के 12 शहर सोमवार सुबह खराब हवा वाले ऑरेंज जोन में दर्ज किए गए, जबकि भिवाड़ी फिर से रेड जोन में पहुंच गया। सुबह 8 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, भिवाड़ी के वसुंधरा नगर UIT मॉनिटरिंग स्टेशन पर AQI 324 दर्ज हुआ, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। वहीं, शहर के ही एक अन्य स्टेशन रीको इंडस्ट्रियल एरिया में AQI 263 रहा, जो ऑरेंज कैटेगरी में है।
प्रदूषण के हालात बने भयावह, कई शहर ऑरेंज जोन मेंप्रदेश के विभिन्न शहरों में हवा की गुणवत्ता पिछले कई दिनों से गिरती जा रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ बढ़ गई हैं। बीकानेर में AQI 208, बूंदी में 255, और भीलवाड़ा में 212 दर्ज हुआ, जो हवा में मौजूद हानिकारक कणों की बढ़ती मात्रा को दर्शाता है। चूरू का AQI 207 रहा तो कोटा के धानमंडी क्षेत्र में यह 282 तक पहुंच गया। कोटा के नयापुरा और श्रीनाथपुरम दोनों ही स्टेशन ऑरेंज कैटेगरी में रहे।
सीकर में AQI 238, झालावाड़ में 223, जबकि टोंक में 242 रिकॉर्ड हुआ। श्रीगंगानगर में प्रदूषण स्तर 246 तक पहुँचा, जिससे वहां की हवा भी ‘खराब’ श्रेणी में आ गई। बढ़ते प्रदूषण ने लोगों की दिनचर्या, खासकर सुबह-शाम बाहर निकलने की आदतों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है, जिसके चलते नियंत्रण के लिए सख़्त कदमों की जरूरत महसूस की जा रही है।
जयपुर भी प्रदूषण की मार में, कई स्टेशन ऑरेंज जोन मेंराजधानी जयपुर की वायु गुणवत्ता भी इस सर्द सुबह खराब रही। आदर्श नगर में सुबह 8 बजे AQI 223, मानसरोवर में 280, और सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में 240 दर्ज किया गया। वहीं, शास्त्री नगर में AQI 258 रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राजधानी की हवा भी लोगों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर रही है।
कैसे सुधारें हवा की क्वालिटी? विशेषज्ञों ने दिए आसान उपायलगातार बिगड़ती हवा की स्थिति को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जागरूकता बढ़ाने की अपील की है। बोर्ड ने एक्स (X) पर साझा किया कि कुछ सरल कदम अपनाकर वायु प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इनमें स्वच्छ ईंधन का उपयोग, अधिक से अधिक हरित क्षेत्र विकसित करना और कचरे का जिम्मेदार प्रबंधन शामिल है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि आम नागरिकों के छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। सामूहिक प्रयास न केवल हवा की गुणवत्ता सुधारेंगे, बल्कि भविष्य में प्रदूषण रोकने की दिशा में सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकते हैं।
AQI समझें आसान भाषा में — कौन-सा स्तर कितना खतरनाक?राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (NAQI) हवा को कई श्रेणियों में बांटता है:
101–200 (मध्यम श्रेणी): दमा, हृदय और फेफड़ों से संबंधित मरीजों को दिक्कत बढ़ सकती है।
201–300 (खराब/ऑरेंज जोन): लंबे समय तक संपर्क में रहने पर अधिकतर लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
301–400 (बहुत खराब/रेड जोन): श्वसन संबंधी रोग बढ़ने का खतरा काफी अधिक होता है।
401–500 (गंभीर/डार्क रेड जोन): यह हवा अत्यंत खतरनाक मानी जाती है, जो स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकती है और बीमार व्यक्तियों की स्थिति को गंभीर बना देती है।