CJP का आंदोलन थमा, अब अयोध्या मुद्दे पर विपक्ष की नजर

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर पर कई दिनों से जारी आंदोलन समाप्त हो गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजनीति का फोकस अब एक नए मुद्दे की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संसद के भीतर और बाहर विपक्ष अब अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकता है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मामले को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति बना सकते हैं।

20 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन CJP ने संसद मार्च का आह्वान किया था। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ, लाठीचार्ज की घटनाएं सामने आईं और इसके बाद विपक्ष ने पूरे जोर-शोर से इस मुद्दे को संसद के भीतर उठाया। लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही भी प्रभावित रही और पेपर लीक के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक वह इस विषय पर चर्चा में भाग नहीं लेगी।

अब जबकि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है और सरकार सोमवार को पेपर लीक रोकने के उद्देश्य से नया परीक्षा सुधार विधेयक (Exam Reform Bill) पेश करने की तैयारी में है, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष अपना अगला हमला अयोध्या से जुड़े विवादों पर केंद्रित कर सकता है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं कि केवल शिक्षा मंत्री ही नहीं, बल्कि गृह मंत्री को भी इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। ऐसे में कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल अयोध्या के मुद्दे को आधार बनाकर गृह मंत्री अमित शाह को भी निशाने पर लेने की रणनीति अपना सकते हैं।
मानसून सत्र से पहले अयोध्या था विपक्ष का मुख्य एजेंडा

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले विपक्षी दलों की प्राथमिकता अयोध्या राम मंदिर से जुड़े विवादों को उठाने की थी। हालांकि, CJP का आंदोलन तेजी से राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन गया, जिसके बाद विपक्ष ने अपना पूरा ध्यान NEET पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन पर केंद्रित कर दिया।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग किया गया और इसके लिए गृह मंत्रालय जवाबदेह है। उन्होंने इसे संसद में उठाए जाने वाला महत्वपूर्ण विषय बताया था। शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में भी राहुल गांधी ने कहा कि पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।

पेपर लीक विधेयक के बाद बदल सकती है विपक्ष की रणनीति

सरकार सोमवार को लोकसभा में पेपर लीक रोकने, दोषियों के खिलाफ सख्त सजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्थाओं वाला विधेयक पेश करने जा रही है। यदि इस मुद्दे पर चर्चा पूरी हो जाती है, तो माना जा रहा है कि विपक्ष का अगला राजनीतिक फोकस अयोध्या विवाद पर होगा।

इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक कारण उत्तर प्रदेश भी माना जा रहा है। वर्ष 2027 में राज्य विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस तथा समाजवादी पार्टी पहले से ही प्रदेश में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी हैं। ऐसे में अयोध्या से जुड़े मुद्दों को विपक्ष चुनावी रणनीति का हिस्सा बना सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़े आरोपों और विवादों को लेकर विपक्ष सरकार से जवाब मांगने की तैयारी कर सकता है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर रहेगा विशेष फोकस

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय राजनीति का सबसे अहम केंद्र बन सकता है। राज्य की चुनावी अहमियत को देखते हुए सभी प्रमुख दल अपने-अपने मुद्दों को जनता के बीच मजबूती से रखने की कोशिश करेंगे। विपक्ष की रणनीति में अयोध्या और उससे जुड़े विवादों को प्रमुख स्थान मिलने की संभावना जताई जा रही है।

वहीं, दूसरी ओर भाजपा भी संसद के भीतर और बाहर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार अब परीक्षा सुधार विधेयक के जरिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाने का प्रयास करेगी। साथ ही भाजपा विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए पिछली सरकारों के कार्यकाल में सामने आए कथित मामलों और अपनी उपलब्धियों को भी प्रमुखता से उठाने की रणनीति अपना सकती है। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर इन मुद्दों को लेकर तीखी बहस देखने की संभावना है।