राजस्थान सहित पूरे देश में पेट्रोल के दाम बढ़े, 2 रुपये से ज्यादा की हुई बढ़ोतरी

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के ईंधन बाजार पर भी साफ नजर आने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच देशभर में पेट्रोल महंगा हो गया है। खासतौर पर प्रीमियम पेट्रोल के दामों में 2 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। नई दरें 20 मार्च से लागू कर दी गई हैं, जिससे बाजार में तुरंत प्रभाव देखने को मिला है।

सरकारी तेल विपणन कंपनियों—जैसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL)—ने अपने हाई-ऑक्टेन पेट्रोल वेरिएंट्स की कीमतों में 2.09 रुपये से लेकर करीब 2.35 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करेगी, जो प्रीमियम ईंधन का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इनका उपयोग आमतौर पर हाई-परफॉर्मेंस वाहनों में किया जाता है।

हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल सामान्य पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे आम उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में सामान्य ईंधन की कीमतों में भी बढ़ोतरी संभव है।
प्रीमियम पेट्रोल की खासियत इसकी बेहतर गुणवत्ता और इंजन के लिए अधिक प्रभावी प्रदर्शन है। यह न केवल स्मूद ड्राइविंग का अनुभव देता है, बल्कि बेहतर माइलेज और इंजन की कार्यक्षमता को भी बढ़ाता है। ऐसे में इसकी कीमतों में इजाफा सीधे तौर पर उन वाहन चालकों को प्रभावित करेगा, जो अपने वाहनों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन का चुनाव करते हैं। मेट्रो शहरों में रहने वाले और महंगे वाहनों का उपयोग करने वाले लोगों पर इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।

इस बढ़ोतरी के पीछे भले ही तेल कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया हो, लेकिन जानकारों का मानना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और परिवहन लागत में वृद्धि इसके प्रमुख कारण हैं। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बना हुआ है।

19 मार्च को ही वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। ब्रेंट क्रूड का भाव 4 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 111.78 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इस तेजी ने संकेत दे दिए हैं कि आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर सीधे तौर पर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।