राजस्थान में ओवैसी-बेनीवाल साथ आए, तीसरे मोर्चे की अटकलों के बीच BJP-कांग्रेस पर साधा निशाना

राजस्थान में शहरी निकाय चुनावों के बीच रविवार को जयपुर में असदुद्दीन ओवैसी और हनुमान बेनीवाल की संयुक्त जनसभा ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी। एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) प्रमुख बेनीवाल एक ही मंच पर नजर आए। दोनों नेताओं ने भाजपा और कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए अपने गठजोड़ को राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश किया। इस संयुक्त कार्यक्रम के बाद राजस्थान में संभावित ‘थर्ड फ्रंट’ को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।

दोनों नेता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के वार्ड 146 में एआईएमआईएम प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित सभा में पहुंचे थे। सभा के दौरान ओवैसी ने एआईएमआईएम उम्मीदवार के पक्ष में मतदान की अपील की। वहीं, जिन वार्डों में आरएलपी प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, वहां उन्होंने मतदाताओं से आरएलपी के उम्मीदवारों का समर्थन करने को कहा।

भाजपा-कांग्रेस के बीच नए विकल्प का दावा


ओवैसी ने कहा कि राजस्थान की राजनीति लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के बीच केंद्रित रही है, लेकिन अब मतदाताओं के सामने एक अलग राजनीतिक विकल्प रखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने 11 सितंबर को होने वाले निकाय चुनावों को महत्वपूर्ण बताते हुए जनता से एआईएमआईएम उम्मीदवार के समर्थन की अपील की।

उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए शिक्षा व्यवस्था, सरकारी स्कूलों में सुविधाओं और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए। ओवैसी ने यह भी कहा कि चुनावी राजनीति का केंद्र सांप्रदायिक मुद्दों के बजाय आम लोगों की बुनियादी जरूरतें होनी चाहिए।
जाट-मुस्लिम राजनीतिक सहयोग पर बेनीवाल का जोर

हनुमान बेनीवाल ने ओवैसी के साथ मंच साझा करने को राजस्थान की राजनीति में एक नई शुरुआत के तौर पर पेश किया। उन्होंने जाट और मुस्लिम समुदायों के बीच राजनीतिक सहयोग की बात कही और इसे आगे बढ़ाने के संकेत दिए।

आरएलपी प्रमुख ने किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कथित पेपर लीक के मामलों, किसानों की चिंताओं, अग्निवीर भर्ती योजना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए। बेनीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी।

क्या विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा तालमेल?

जयपुर की इस संयुक्त सभा के बाद केवल निकाय चुनाव तक सीमित राजनीतिक तालमेल के बजाय भविष्य के चुनावों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। ओवैसी और बेनीवाल की ओर से संकेत दिया गया कि दोनों दल आने वाले चुनावों में भी साथ आ सकते हैं। इसमें राजस्थान विधानसभा चुनाव भी शामिल हैं।

फिलहाल इस संयुक्त रैली ने राज्य की चुनावी राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के अलावा एक संभावित तीसरे राजनीतिक विकल्प को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है। निकाय चुनाव के दौरान दोनों नेताओं का एक मंच पर आना और एक-दूसरे के उम्मीदवारों के समर्थन की अपील करना इस राजनीतिक तालमेल को लेकर महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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