राजस्थान के भरतपुर जिले के राजकीय जनाना अस्पताल से एक बेहद चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है, जिसने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 9 जुलाई को अस्पताल में दो नवजातों के रेफर के दौरान बच्चों की पहचान में घोर चूक हुई और एक नवजात बच्ची को दूसरे नवजात लड़के के दस्तावेजों के साथ जयपुर के जेके लोन अस्पताल भेज दिया गया। जैसे ही गलती का पता चला, अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और परिजनों में आक्रोश फैल गया।
कागजी गड़बड़ी से बदल गए बच्चेघटना की पुष्टि करते हुए शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु गोयल ने बताया कि नदबई के बेर हाउस निवासी डोली पत्नी छोटेलाल ने 19 जून को सात माह के एक नवजात बेटे को जन्म दिया था, जिसकी हालत नाजुक होने के कारण उसे एसएनसीयू (विशेष नवजात देखभाल इकाई) में मशीन पर रखा गया था। उसी यूनिट में अछनेरा निवासी प्रियंका पत्नी दीनदयाल की नवजात बच्ची भी भर्ती थी, जिसे सांस की तकलीफ थी।
9 जुलाई को दोपहर 3 बजे डोली के नवजात बेटे को जयपुर रेफर किया जाना था, लेकिन रेफर डॉक्यूमेंट की अदला-बदली की वजह से प्रियंका की बच्ची को ही लड़के के कागजों के साथ जयपुर भेज दिया गया। अस्पताल स्टाफ को इस लापरवाही का पता उसी दिन शाम को चला, जब परिजनों ने बच्चे की पहचान को लेकर सवाल उठाए।
हंगामे के बाद मानी गई गलती, दोनों बच्चे अब जयपुर में भर्ती, स्थिति नियंत्रण मेंइस गलती के सामने आते ही अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू हो गया। परिजनों ने जब बच्चों की हालत और पहचान को लेकर सवाल किए तो अस्पताल प्रशासन ने दस्तावेज़ों की जांच की और गलती स्वीकार की। डोली का नवजात बेटा तब तक प्रियंका के पास पहुंच चुका था और उसे ही जयपुर रेफर कर दिया गया। बाद में अस्पताल स्टाफ ने जेके लोन अस्पताल, जयपुर में फोन कर दोनों बच्चों की पहचान स्पष्ट की और जरूरी सुधार करवाया।
डॉ. गोयल ने बताया कि हालांकि घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी, लेकिन समय रहते पहचान स्पष्ट हो जाने से किसी बड़े नुकसान से बचा जा सका। दोनों नवजातों को जयपुर रेफर किया जाना जरूरी था और अब वे जेके लोन अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका सही इलाज चल रहा है।
गंभीर लापरवाही ने खोली व्यवस्थाओं की पोलयह घटना अस्पताल में फैली अव्यवस्था और लापरवाह व्यवस्था की एक बानगी है। इतने संवेदनशील मामले में जहां दो नवजात बच्चों की जिंदगी दांव पर थी, रेफर डॉक्यूमेंट की अदला-बदली जैसी भूल होना न केवल चिंता का विषय है, बल्कि मेडिकल प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाने वाला मामला है।
इस घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि यदि समय रहते गलती न पकड़ी जाती, तो यह चूक किसी बड़े संकट में बदल सकती थी।
एक सावधानी, कई ज़िंदगियां सुरक्षितजनाना अस्पताल भरतपुर की यह घटना केवल एक त्रुटि नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि नवजातों की देखभाल और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लापरवाही की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह इस पूरे मामले की गहन जांच कर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और अस्पतालों में जनविश्वास बना रहे।