जयपुर में जल जीवन मिशन से जुड़े कथित घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मंगलवार को सख्त कदम उठाते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में पीएचईडी के छह सेवारत अधिकारी और तीन सेवानिवृत्त अधिकारी शामिल हैं। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही जांच के बाद की गई है, जिसमें हजारों करोड़ रुपये के वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई थी।
मामले की तह तक पहुंचने के लिए एसीबी ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। इसी एसआईटी की सिफारिश पर यह गिरफ्तारी हुई। इससे पहले वर्ष 2023 में भी एसीबी ने इस प्रकरण में ट्रैप कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया था। उस दौरान 11 आरोपियों और दो निजी फर्मों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।
अलसुबह 15 ठिकानों पर दबिशजांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एसीबी की करीब डेढ़ दर्जन टीमों ने मंगलवार तड़के जयपुर, बाड़मेर, उदयपुर, करौली, दिल्ली सहित अन्य राज्यों में लगभग 15 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इन ठिकानों से संबंधित अधिकारियों और अन्य आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। बाद में उन्हें जयपुर लाकर विस्तृत पूछताछ के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल उनसे गहन पूछताछ जारी है और आगे की जांच प्रक्रिया चल रही है।
ये अधिकारी आए गिरफ्त मेंएसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, इस मामले में मुख्य अभियंता (प्रशासन) दिनेश गोयल, मुख्य अभियंता (ग्रामीण) के.डी. गुप्ता, आरडब्ल्यूएसएसएमसी के तत्कालीन सचिव एवं वर्तमान अतिरिक्त मुख्य अभियंता (जयपुर क्षेत्र-द्वितीय) सुभांशु दीक्षित, वित्तीय सलाहकार (अक्षय ऊर्जा) सुशील शर्मा, चूरू के मुख्य अभियंता निरिल कुमार और निलंबित अधिशासी अभियंता विशाल सक्सेना को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता डी.के. गौड़ और सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता महेंद्र प्रकाश सोनी भी गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं।
फर्जी दस्तावेजों से हासिल किए गए टेंडरएसीबी की जांच में यह तथ्य सामने आया कि कुछ निजी कंपनियों ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर बड़े पैमाने पर ठेके हासिल किए। आरोप है कि श्रीगणपति ट्यूबवेल कंपनी के प्रोप्राइटर महेश मित्तल और श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी के प्रोप्राइटर पदमचंद जैन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के नाम से जाली कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र तैयार कराए। इन दस्तावेजों को आधार बनाकर पीएचईडी के वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से लगभग 960 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ।
टेंडर प्रक्रिया में नियमों से खिलवाड़जांच में यह भी सामने आया है कि 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले बड़े प्रोजेक्ट्स की निविदाओं में नियमों के विपरीत साइट विजिट को अनिवार्य कर दिया गया। इससे बोलीदाताओं की पहचान उजागर हुई और कथित रूप से टेंडर पुलिंग को बढ़ावा मिला, जिसके परिणामस्वरूप असामान्य रूप से ऊंचा टेंडर प्रीमियम सामने आया। आरोप है कि इन प्रस्तावों को विभागीय अधिकारियों ने मंजूरी देकर वित्तीय अनियमितताओं को बढ़ावा दिया।
एसआईटी की निगरानी में जारी है जांचप्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसपी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया। डीआईजी राजेश सिंह और डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के पर्यवेक्षण में टीम ने साक्ष्यों का परीक्षण कर गिरफ्तारी की कार्रवाई को अंजाम दिया। एडीजी स्मिता श्रीवास्तव की निगरानी में आरोपियों से पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।