राजस्थान के कोटा संभाग में लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बीती रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद निचले इलाकों में पानी भर गया, वहीं प्रमुख डैमों का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच चुका है। हालात को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज से बड़े पैमाने पर पानी की निकासी शुरू कर दी है। साथ ही कोटा से धौलपुर तक अलर्ट जारी कर दिया गया है।
राणा प्रताप सागर डैम से पहली बार खुले गेट, 39 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गयाजल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राणा प्रताप सागर डैम इस सीजन में पहली बार ओवरफ्लो की स्थिति में पहुंचा। डैम में 1.25 लाख क्यूसेक पानी के इनफ्लो के चलते 33 हजार क्यूसेक पानी गेट्स से और 6100 क्यूसेक पानी मशीनों के माध्यम से छोड़ा गया। कुल मिलाकर 39,100 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। डैम का जलस्तर 1156.56 फीट तक पहुंच चुका है, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 1157.50 फीट है — यानी यह लगभग 98.30% भर चुका है।
जवाहर सागर और कोटा बैराज से भी हो रही है भारी निकासीजवाहर सागर डैम से भी जल निकासी तेज कर दी गई है। यहां से कुल 63,276 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिसमें से 51,000 क्यूसेक गेट्स से और 12,276 क्यूसेक मशीनों द्वारा निकाला जा रहा है। वहीं कोटा बैराज से 75,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि बैराज का जलस्तर 852 फीट पर नियंत्रित किया गया है। साथ ही आरएमसी कैनाल में 15 और एलएमसी कैनाल में 50 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
भीमसागर और उजाड़ डैम भी निकासी में सक्रियहाड़ौती क्षेत्र के अन्य डैम भी पानी से लबालब हो चुके हैं। कालीसिंध नदी पर स्थित भीमसागर डैम से 9270 क्यूसेक और उजाड़ नदी पर बने भीम सागर डैम से 1100 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। लगातार बारिश और डैम से हो रही निकासी के चलते आसपास के गांवों और बस्तियों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
गांधी सागर डैम अभी आधा भरा, लेकिन सतर्कता जरूरीगांधी सागर डैम में हालांकि फिलहाल 1289.35 फीट जलस्तर है, जबकि इसकी पूरी क्षमता 1312 फीट है। यानी अभी भी 22.65 फीट पानी की गुंजाइश बाकी है। यह डैम 7164.95 मिलियन क्यूबिक मीटर की क्षमता रखता है और अभी उसमें केवल 3607.35 एमसीएम पानी भरा है। ऐसे में आगामी बारिश को लेकर इस डैम में पानी रोकने की पर्याप्त क्षमता मौजूद है, जिससे रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा।
बस्तियों में जलभराव, मोड़क में हालात गंभीरभारी बारिश का सबसे बुरा असर निचली बस्तियों में देखने को मिला है। मोड़क कस्बे में 50 से 60 घरों में कमर तक पानी भर गया है। नालों का पानी रेलवे लाइन के पास की बस्ती में घुस गया, जिससे लोगों को अचानक हुए जलस्तर में बढ़ोतरी से संभलने का मौका नहीं मिला। प्रशासन ने तत्काल बिजली आपूर्ति बंद कर दी है। स्कूल, पुलिस चौकी और सरकारी कार्यालयों में भी पानी घुस गया है।
खड़े गणेश मंदिर में हर साल की तरह फिर पानी, श्रद्धालुओं में चिंताकोटा शहर का प्रसिद्ध खड़े गणेश जी मंदिर भी जलभराव की चपेट में आ गया है। हर साल की तरह इस बार भी मंदिर परिसर में पानी भर गया है और पानी सीधे भगवान गणेश के चरणों तक पहुंच गया है। स्थानीय श्रद्धालु और पुजारी इसे प्राकृतिक संकेत मानते हुए चिंतित हैं, लेकिन साथ ही प्रशासन से राहत की मांग भी कर रहे हैं।
प्रशासन अलर्ट मोड में, लेकिन खतरा टला नहींफिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बारिश की तीव्रता बनी रही तो हालात और बिगड़ सकते हैं। जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन चौकन्ना है, लेकिन नागरिकों से अपील की गई है कि वे निचले इलाकों में सावधानी बरतें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। अगले कुछ दिन कोटा और आसपास के जिलों के लिए निर्णायक हो सकते हैं।