डिजिटल पेमेंट सिस्टम से भुगतान व्यवस्था हुई अधिक पारदर्शी, अमित शाह ने गिनाईं सहकारिता की बड़ी उपलब्धियां

जयपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी कदमों के जरिए बड़े परिवर्तन संभव हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की, जिसके बाद देश में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा और गति मिली। इससे कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि सुनियोजित रोडमैप के माध्यम से सहकारी क्षेत्र की कमियों को दूर किया गया और इसे आधुनिक तकनीक से जोड़कर अधिक सक्षम एवं पारदर्शी बनाया गया।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का आधुनिकीकरण करते हुए उन्हें ई-पैक्स प्रणाली से जोड़ा गया है। इससे समितियों के संचालन, लेखा-जोखा और ऑडिट की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और पारदर्शी हो गई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू होने से किसानों और लाभार्थियों तक धनराशि सीधे और पारदर्शी तरीके से पहुंच रही है, जिससे भुगतान प्रक्रिया में भरोसा और जवाबदेही दोनों बढ़ी हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सहकारिता आज केवल आर्थिक गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों, पशुपालकों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मजबूती देने के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती को अधिक से अधिक अपनाने की अपील करते हुए कहा कि भूमि का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार रासायनिक उर्वरकों और केमिकल आधारित खेती पर अत्यधिक निर्भरता से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, जबकि जैविक खेती भविष्य की टिकाऊ कृषि व्यवस्था का मजबूत विकल्प है।

अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी की राष्ट्रवादी सोच और दूरदृष्टि ने देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने याद दिलाया कि डॉ. मुखर्जी ने देश में ‘दो विधान, दो प्रधान और दो निशान’ के विरोध में आंदोलन चलाया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाकर उनके उस संकल्प को साकार किया।

सहकारिता से गांव-गांव तक पहुंच रही आर्थिक मजबूती

समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश में सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र आज करोड़ों किसानों, पशुपालकों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तीकरण का आधार बन चुका है। राज्य सरकार भी इसी सोच के अनुरूप सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने और उनके दायरे का विस्तार करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने राजस्थान में सहकारिता क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य का सहकारिता आंदोलन अब गांव-ढाणी तक पहुंच चुका है। वर्तमान में प्रदेश में 42 हजार से अधिक सहकारी समितियां सक्रिय हैं, जिनसे लगभग एक करोड़ 35 लाख सदस्य जुड़े हुए हैं। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार के सदस्यता अभियान के तहत 8 लाख 90 हजार नए सदस्यों को सहकारी समितियों से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में सहकारी समिति का गठन सुनिश्चित करना है।

डेयरी सहकारिता मॉडल बना लाखों परिवारों की ताकत

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान का डेयरी सहकारिता मॉडल आज लाखों पशुपालक परिवारों की आय का मजबूत आधार बन चुका है। उन्होंने बताया कि डबल इंजन सरकार की नीतियों और प्रभावी प्रबंधन के कारण पहले घाटे में चल रहे डेयरी संघ अब लाभ की स्थिति में पहुंच गए हैं। राज्य ने डेयरी क्षेत्र में 10 हजार करोड़ रुपये का रिकॉर्ड कारोबार दर्ज किया है। साथ ही राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF) और जिला दुग्ध संघों ने लाभ और कारोबार दोनों के मामले में पिछले 47 वर्षों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है।

राजस्थान को मिली कई नई सौगातें


समारोह के दौरान राजस्थान को सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सौगात भी मिली। राज्य में 10 नए अन्न भंडारण गोदामों का शिलान्यास किया गया, जबकि 50 तैयार गोदामों का लोकार्पण भी हुआ। इसके अलावा 100 गोदामों को राज्य भंडारण निगम को हस्तांतरित किया गया, जिससे भंडारण क्षमता और कृषि अवसंरचना को मजबूती मिलेगी।

इसी अवसर पर ‘सहकार वन’ परियोजना का ई-भूमि पूजन भी किया गया। यह परियोजना जयपुर के सुमेल गांव में लगभग 64 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएगी। इस हरित पहल के अंतर्गत खेजड़ी, रोहिड़ा, नीम सहित स्थानीय और पर्यावरण के अनुकूल वृक्षों का बड़े स्तर पर रोपण किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सहकारिता और जनभागीदारी का भी उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी।
मियावाकी और पारंपरिक पौधरोपण से पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा, सहकारिता बन रही ग्रामीण आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार सहकारिता के माध्यम से महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने का कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) और विभिन्न जिला दुग्ध संघों से वर्तमान में करीब 9 लाख 40 हजार दुग्ध उत्पादक सदस्य जुड़े हुए हैं, जिनमें 4 लाख 20 हजार से अधिक महिलाएं शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि सहकारिता आंदोलन ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में हजारों नए दुग्ध संग्रह केंद्र स्थापित किए गए हैं और बड़ी संख्या में नई दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का गठन किया गया है। इसके साथ ही हजारों नए पशुपालक भी इस अभियान से जुड़े हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ी है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रतिदिन दुग्ध संकलन 38 लाख लीटर से बढ़कर 45 लाख लीटर तक पहुंच गया है। वहीं, डेयरी सहकारिता से जुड़े नए सदस्यों की संख्या में 70 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

5,646 से अधिक ई-पैक्स बने, ऑनलाइन लेनदेन ने बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पैक्स (PACS) के कंप्यूटरीकरण अभियान को तेज गति से आगे बढ़ाया है। पहले चरण में 5,646 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को ई-पैक्स के रूप में विकसित किया जा चुका है। इन समितियों के माध्यम से अब तक 10 करोड़ से अधिक ऑनलाइन लेनदेन किए जा चुके हैं, जो देशभर में हुए कुल ई-पैक्स ट्रांजेक्शनों का लगभग एक-तिहाई है। इस उपलब्धि के साथ राजस्थान इस क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश की करीब 4,875 पैक्स समितियां अब तीन या उससे अधिक व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन कर रही हैं। इनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे ग्रामीण नागरिकों को अनेक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही मिल रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की प्रत्येक ग्राम पंचायत में सहकारी समिति स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना के तहत राजस्थान ने अब तक 5,279 नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन किया है। इनमें 1,977 एम-पैक्स (Multipurpose PACS) स्थापित कर राज्य ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। इसके अलावा भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की सदस्यता दिलाने के मामले में भी राजस्थान राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान पर है।

मजबूत सहकारिता से सशक्त होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था : राजीव रंजन सिंह

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि जितनी मजबूत सहकारिता व्यवस्था होगी, उतनी ही मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं और सकारात्मक नीतियों का परिणाम है कि आज भारत दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में विश्व में प्रथम स्थान पर है। साथ ही सहकारी समितियों के माध्यम से संग्रहित दूध की गुणवत्ता में भी निरंतर सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से किसानों और पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

सहकारिता को नई ऊंचाई देने वाले कई नवाचारों की शुरुआत

सहकारिता मंत्रालय के स्थापना दिवस समारोह के दौरान कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और डिजिटल पहलों का शुभारंभ भी किया गया। इस अवसर पर 50 हजार पैक्स समितियों को ई-पैक्स प्रणाली में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। इसके अलावा अन्न भंडारण योजना के अंतर्गत 135 गोदामों का हस्तांतरण, 85 नए गोदामों का लोकार्पण तथा 47 गोदामों का शिलान्यास किया गया।

समारोह में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की टिश्यू कल्चर सुविधाओं का ई-भूमि पूजन भी किया गया। साथ ही राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पोर्टल 3.0, जियो टैग मोबाइल एप, एनडीडीबी (NDDB) का मिल्क सप्लाई रिव्यू डैशबोर्ड पोर्टल तथा को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन मल्टी स्टेट लिमिटेड एवं गोमय सहकारी समिति मल्टी स्टेट लिमिटेड का शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम के दौरान सहकारिता क्षेत्र की उपलब्धियों और नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। साथ ही डेयरी सहकारी समितियों के लिए तैयार आदर्श उप-विधियों तथा सहकारिता मंत्रालय के पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, केंद्रीय सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल, राजस्थान के सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, केंद्रीय सहकारिता एवं कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा देशभर से बड़ी संख्या में सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।