राजस्थान के भरतपुर जिले के नगर कस्बे में दो साल पहले हुए चर्चित जितेन्द्र हत्याकांड का फैसला गुरुवार को अदालत में सुनाया गया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल सिंह की अदालत ने मृतक की पत्नी दीपा और उसके प्रेमी दीपक सैनी को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया। अर्थदंड न देने की स्थिति में दोनों को 6-6 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
एमपी की सोनम जैसी ही थी दीपा की साजिशमध्यप्रदेश की चर्चित सोनम हत्याकांड की तरह इस मामले में भी दीपा ने बेहद सुनियोजित साजिश रची थी। दीपा और उसके प्रेमी दीपक सैनी ने पोंछा लगाने वाले कपड़े से मिलकर पति जितेन्द्र का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी। दोनों ने इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश भी की, लेकिन एक छोटी सी चूक ने इस हत्याकांड की सच्चाई को उजागर कर दिया।
बेटी अर्चना की गवाही बनी सबसे बड़ा मोड़इस मुकदमे में मृतक की नाबालिग बेटी अर्चना की गवाही सबसे निर्णायक साबित हुई। अदालत के समक्ष दिए अपने बयान में अर्चना ने साफ तौर पर बताया कि उसकी मां दीपा और दीपक सैनी ने मिलकर उसके पिता की हत्या की थी। अर्चना की यह गवाही अदालत के निर्णय में केंद्रीय भूमिका निभाई।
अदालत का 94 पेज का फैसला और 33 गवाहन्यायाधीश ने 94 पृष्ठों में विस्तृत निर्णय में 33 गवाहों की गवाही और 47 दस्तावेजों के साक्ष्य के आधार पर दोषियों को सजा सुनाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हत्या की योजना पूर्व नियोजित थी और दोनों आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से अपने संबंधों को छुपाकर इस अपराध को अंजाम दिया।
साजिश में ये थी ‘वो एक चूक’जितेन्द्र की हत्या को आत्महत्या दिखाने के लिए दीपा और दीपक ने शव को कमरे में लटका दिया था। लेकिन पुलिस को घटनास्थल की स्थिति और शरीर पर मौजूद निशानों से संदेह हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई। इसके बाद जब पुलिस ने गहनता से पूछताछ की, तो हत्या की परतें खुलती चली गईं।
सामाजिक रिश्तों को कलंकित करता मामलायह मामला न सिर्फ आपराधिक है, बल्कि सामाजिक संबंधों पर भी सवाल खड़े करता है। एक पत्नी द्वारा अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या करना और अपनी ही बेटी के समक्ष उस पाप को अंजाम देना, समाज को झकझोर देने वाला उदाहरण है। अदालत ने भी अपने फैसले में कहा कि यह अपराध सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने वाला है और ऐसे अपराधियों को सख्त सजा मिलनी ही चाहिए।
भरतपुर का जितेन्द्र हत्याकांड एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि अपराध कितना भी सोच-समझकर किया गया हो, सच्चाई एक न एक दिन सामने आ ही जाती है। दीपा और दीपक की साजिश को उनकी ही बेटी ने उजागर कर दिया। न्यायपालिका ने भी समाज को यह संदेश दिया है कि सच की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, और न्याय कभी चूकता नहीं।