सीएम भजनलाल की अद्वितीय भक्ति, दंडवत करते हुए की 21 किमी लंबी गोवर्धन परिक्रमा

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नए साल 2026 का स्वागत एक अनोखे और भक्ति-भरे अंदाज में किया। जयपुर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वे गिरिराज गोवर्धन महाराज की 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा के लिए निकले। यह नजारा देखकर हर कोई हैरान रह गया, क्योंकि मुख्यमंत्री ने किसी औपचारिक कार्यक्रम के बजाय आम भक्तों की तरह जमीन पर दंडवत करते हुए यात्रा की शुरुआत की।

पुत्रदा एकादशी पर पवित्र यात्रा

पुत्रदा एकादशी के पावन दिन मुख्यमंत्री ने राजस्थान के डीग जिले में स्थित श्रीनाथ जी के मंदिर से गोवर्धन परिक्रमा शुरू की। पहले वे जयपुर से पूंछरी के लौठा मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की। मंदिर में ब्रजरज को माथे पर लगाकर श्रीनाथ जी के सामने सिर झुकाया। गिरिराज गोवर्धन के चरणों में समय बिताते हुए उन्होंने आध्यात्मिक शांति और संतोष प्राप्त किया। यात्रा के दौरान रात का विश्राम भी इसी पवित्र स्थल पर किया गया।

मिट्टी पर दंडवत करते हुए आम भक्त की तरह


मुख्यमंत्री ने बिना किसी चटाई या आसन के सीधे मिट्टी पर कनक दंडवत किया। जतीपुरा में मुखारविंद के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। यह उनकी पुरानी परंपरा है, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला मौका था जब वे सार्वजनिक रूप से इस तरह भक्ति प्रकट करते नजर आए। हर साल बड़े अवसरों पर वे पूंछरी के लौठा मंदिर में सिर झुकाने आते हैं।

परिवार के साथ भक्ति की झलक

इस बार मुख्यमंत्री के साथ उनका पूरा परिवार भी परिक्रमा में शामिल रहा, जो उनके लिए इस यात्रा की आध्यात्मिक और पारिवारिक महत्व को दर्शाता है। यह दिखाता है कि उनकी भक्ति सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि परिवार और परंपरा से जुड़ी हुई है।

प्रदेश के कल्याण की प्रार्थना

गिरिराज महाराज के चरणों में मुख्यमंत्री ने राजस्थान के समग्र विकास, जन-जन के कल्याण और लोगों में नई ऊर्जा का आशीर्वाद मांगा। नववर्ष की पूर्व संध्या पर यह यात्रा न केवल उनकी गहरी भक्ति को उजागर करती है, बल्कि आम लोगों को भी प्रेरित करती है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह कदम यह संदेश देता है कि सत्ता और आस्था का संगम कितना सुंदर और प्रभावशाली हो सकता है। उनकी सादगी और निष्ठा के कारण यह घटना राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग उनकी भक्ति एवं सरलता की सराहना कर रहे हैं।