भीलवाड़ा: एसडीएम को अतिक्रमण की अर्जी देकर युवक ने की आत्महत्या, शिविर में मचा हड़कंप

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां अतिक्रमण से परेशान एक युवक ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाने के बाद आत्महत्या कर ली। यह घटना पारोली थाना क्षेत्र के रोपा गांव में गुरुवार को आयोजित पंडित दीनदयाल अंत्योदय शिविर के दौरान हुई।

अतिक्रमण हटाने की अर्जी के बाद उठाया आत्मघाती कदम

बूंदी जिले के बरूधन निवासी नित्यानंद सनाड्य अपने मित्र भीमराज मीणा के साथ रोपा गांव के राजकीय विद्यालय में आयोजित अंत्योदय शिविर में पहुंचा था। उसने शिविर प्रभारी एसडीएम राजकेश मीणा को अपनी पुश्तैनी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए एक आवेदन पत्र सौंपा। लेकिन अर्जी देने के तुरंत बाद उसने स्कूल के बाहर जाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद मौके पर हड़कंप मच गया।

अस्पताल में तोड़ा दम, वायरल किया था सुसाइड नोट

ग्रामीणों ने गंभीर हालत में नित्यानंद को पंडेर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां से उसे शाहपुरा और फिर भीलवाड़ा जिला अस्पताल रेफर किया गया। शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। आत्महत्या से पहले नित्यानंद ने सोशल मीडिया पर एक सुसाइड नोट वायरल किया, जिसमें उसने अपनी पीड़ा को विस्तार से बयान किया।
अंतरजातीय विवाह बना विवाद की जड़

सुसाइड नोट में नित्यानंद ने उल्लेख किया कि उसने अंतरजातीय विवाह किया था, जिससे उसके परिजन नाराज हो गए थे। इसी वजह से उसे पैतृक संपत्ति से बेदखल कर दिया गया और उसके ही रिश्तेदारों ने जमीन पर अतिक्रमण कर लिया। उसने बार-बार प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस मानसिक दबाव में आकर उसने शिविर के दौरान आत्मघाती कदम उठा लिया।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी

घटना की पुष्टि करते हुए शाहपुरा के एएसपी राजेश आर्य ने बताया कि मृतक नित्यानंद पूर्व में भी कई बार जमीन विवाद को लेकर शिकायतें कर चुका था। पुलिस ने मामला दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी जांच की मांग उठ रही है।

जमीन विवाद बना राजस्थान में आत्महत्याओं का कारण

यह मामला केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि राजस्थान में लगातार बढ़ते जमीन विवादों और प्रशासनिक निष्क्रियता की ओर इशारा करता है। इससे पहले भी बाड़मेर में एक ही परिवार के चार लोगों ने जमीन विवाद के चलते सामूहिक आत्महत्या की थी। ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि जरूरतमंदों को समय पर न्याय और सहारा न मिलने पर हालात कितने भयावह हो सकते हैं।