'लोकतंत्र की जीत हुई, छात्रों का संघर्ष रंग लाया', शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अशोक गहलोत की प्रतिक्रिया

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के लंबे संघर्ष और लोकतांत्रिक दबाव की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में लाखों छात्रों ने लगातार पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग उठाई, जिसका परिणाम अब सामने आया है। गहलोत के अनुसार यह केवल एक मंत्री के इस्तीफे का मामला नहीं, बल्कि उन छात्रों की आवाज की जीत है जिन्होंने लगातार न्याय की मांग की।

इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ राहुल गांधी और देशभर के लाखों छात्रों द्वारा चलाया गया आंदोलन आखिरकार सफल हुआ है। उनके मुताबिक इस संघर्ष ने देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और जवाब मांगने की संस्कृति को मजबूत किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लंबे समय तक इस मुद्दे पर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करती रही, लेकिन बढ़ते जनदबाव के सामने आखिरकार उसे कार्रवाई करनी पड़ी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोड़ना पड़ा।

गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंबे समय तक धर्मेंद्र प्रधान का बचाव किया, लेकिन जब जनता की जवाबदेही की मांग लगातार तेज होती गई तो सरकार के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। उन्होंने कहा कि यह फैसला इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को हमेशा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और अंततः सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करना ही पड़ता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के शनिवार सुबह दिए गए बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से मांग की थी कि धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाना चाहिए। गहलोत के अनुसार छात्रों और युवाओं के भविष्य के मुद्दे पर राहुल गांधी लगातार मजबूती से उनके साथ खड़े रहे, जिससे आंदोलन को नई ऊर्जा और व्यापक समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है कि जनता के संगठित संघर्ष के सामने किसी भी सरकार को झुकना पड़ता है, चाहे वह कितनी भी मजबूत क्यों न दिखाई दे।
अशोक गहलोत ने आंदोलन के दौरान छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है, जब पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग किया गया। उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन और आंसू गैस जैसे साधनों का इस्तेमाल किया गया, जिसकी व्यापक आलोचना हुई। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र आंदोलन के समर्थन में पहुंचे राहुल गांधी के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह भी लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं था और देश की जनता इन घटनाओं को भूली नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं ने यह संदेश दिया कि सरकार लोकतांत्रिक असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही थी। गहलोत ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं की आवाज को सुनना सरकार की जिम्मेदारी होती है, न कि उनके विरोध को बलपूर्वक रोकने का प्रयास करना। उनके अनुसार इस पूरे घटनाक्रम ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और शासन व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं।

अपने बयान के अंत में अशोक गहलोत ने कहा कि आज का दिन लोकतंत्र की जीत और तानाशाही की हार के रूप में याद किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक पेपर लीक मामले के सभी दोषियों को सजा नहीं मिल जाती, प्रत्येक प्रभावित छात्र को न्याय नहीं मिलता और देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। गहलोत ने विश्वास जताया कि देश की जनता उन लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को कभी माफ नहीं करेगी और जवाबदेही तय होने तक न्याय की मांग लगातार उठती रहेगी।