महाराष्ट्र में सियासी घमासान के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार के खिलाफ मराठवाड़ा में नया आंदोलन शुरू किया है। शनिवार को हिंगोली में पार्टी ने ‘तुमसे ना हो पाएगा’ नाम से प्रदर्शन किया। इस आंदोलन के जरिए उद्धव ठाकरे गुट ने राज्य सरकार पर मराठवाड़ा के विकास को लेकर किए गए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया।
इस प्रदर्शन की अगुवाई विधान परिषद सदस्य और विधान परिषद में विपक्ष के पूर्व नेता अंबादास दानवे ने की। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से विकास कार्यों को लेकर बड़ी संख्या में वादे किए गए थे, लेकिन उनका पर्याप्त हिस्सा पूरा नहीं हुआ।
दानवे का दावा- 780 वादों में से 1.5 प्रतिशत भी पूरे नहींअंबादास दानवे ने दावा किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जिले के लिए विकास कार्यों के 780 वादे किए थे। उनके मुताबिक इनमें से 1.5 प्रतिशत वादे भी पूरे नहीं किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जिले का इस्तेमाल राजनीतिक तौर पर किया, लेकिन विकास के मोर्चे पर अपेक्षित काम नहीं किया।
हालांकि ये आंकड़े शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता अंबादास दानवे की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन्हें सरकार की ओर से प्रमाणित आंकड़े के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
मराठवाड़ा के साथ अन्याय का आरोपप्रदर्शन के दौरान दानवे ने मराठवाड़ा के विकास और क्षेत्र की समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में सबसे ज्यादा किसान आत्महत्याएं मराठवाड़ा क्षेत्र में होती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि 1948 में हैदराबाद के निजाम के शासन से मुक्ति मिलने के बाद मराठवाड़ा बिना किसी शर्त के महाराष्ट्र में शामिल हुआ था। इसके बावजूद उनके अनुसार क्षेत्र को अब भी अपेक्षित विकास और न्याय नहीं मिल पाया है।
17 सितंबर को छत्रपति संभाजीनगर में खत्म होगा आंदोलनशिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) का यह आंदोलन 17 सितंबर को होने वाले मराठवाड़ा मुक्ति दिवस की वर्षगांठ से पहले शुरू किया गया है। पार्टी का कहना है कि आंदोलन के जरिए महायुति सरकार को मराठवाड़ा से जुड़े विकास के मुद्दों पर घेरा जाएगा।
दानवे ने प्रदर्शन के दौरान पार्टी की मांगों को लेकर हिंगोली की रेजिडेंट कलेक्टर प्रतीक्षा भुते को ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने बताया कि यह जन आंदोलन 17 सितंबर को छत्रपति संभाजीनगर में खत्म होगा। इस समापन कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे के मौजूद रहने की बात कही गई है।
‘तुमसे ना हो पाएगा’ क्यों चुना गया?इस आंदोलन के नाम ‘तुमसे ना हो पाएगा’ के जरिए उद्धव ठाकरे गुट ने सरकार पर सीधा राजनीतिक तंज कसा है। यह वाक्य आम तौर पर किसी के काम करने या अपेक्षित परिणाम देने में असमर्थ रहने पर व्यंग्य के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
पार्टी ने इसी संदेश को सरकार के खिलाफ अपने आंदोलन का राजनीतिक नारा बनाया है। इसके जरिए उसका आरोप है कि सरकार ने मराठवाड़ा के लिए जिन विकास कार्यों का वादा किया था, उन्हें जमीन पर उतारने में वह सफल नहीं रही।
मराठवाड़ा मुक्ति दिवस से पहले बढ़ी सियासी हलचल17 सितंबर को मराठवाड़ा मुक्ति दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1948 में क्षेत्र के हैदराबाद के निजाम के शासन से मुक्त होने की याद में मनाया जाता है। ऐसे समय में उद्धव ठाकरे गुट का यह आंदोलन क्षेत्र के विकास, किसान समस्याओं और सरकार के कथित अधूरे वादों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश के तौर पर सामने आया है।