बकाया भुगतान को लेकर अशोक गहलोत का सीएम को 'अति आवश्यक' पत्र, वित्तीय कुप्रबंधन पर उठाए सवाल

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में विभिन्न विभागों में लंबित भुगतानों को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को 'अति आवश्यक' अंकित एक विस्तृत पत्र भेजते हुए आरोप लगाया कि भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, मरीजों, ठेकेदारों और समाज के अनेक वर्गों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे केवल किसी एक योजना या विभाग तक सीमित समस्या नहीं बताते हुए कहा कि वित्तीय प्रबंधन की स्थिति पूरे प्रशासनिक तंत्र को प्रभावित कर रही है। गहलोत ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप कर बकाया राशि का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।

बकाया भुगतान से कई वर्ग प्रभावित होने का दावा

अपने पत्र में अशोक गहलोत ने कहा कि सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी, दुर्घटना पीड़ित परिवार, अस्पताल, दवा आपूर्ति करने वाले संस्थान और छोटे ठेकेदार लंबे समय से अपने वैध भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भुगतान प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी ने हजारों लोगों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। गहलोत ने कहा कि राज्य के इतिहास में वित्तीय कुप्रबंधन की ऐसी स्थिति पहले कभी देखने को नहीं मिली, जहां इतने व्यापक स्तर पर भुगतान अटक गए हों।

आरजीएचएस योजना में भुगतान अटकने पर जताई चिंता

पूर्व मुख्यमंत्री ने राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (RGHS) का उल्लेख करते हुए कहा कि निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और दवा विक्रेताओं के करोड़ों रुपये लंबे समय से लंबित पड़े हैं। उनके अनुसार स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी इसे मानवाधिकारों से जुड़ा विषय मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि कई अस्पतालों ने भुगतान नहीं मिलने की स्थिति में योजना के तहत सेवाएं सीमित करने या समझौते समाप्त करने की चेतावनी तक दी है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा कैशलेस इलाज का दावा किए जाने के बावजूद कर्मचारी और पेंशनभोगी अपनी जेब से इलाज का खर्च उठाने को मजबूर हैं। इसके अलावा चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति (रीइम्बर्समेंट) भी लंबे समय तक लंबित रहने से लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
दुर्घटना बीमा योजना में भी भुगतान लंबित

गहलोत ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री चिरंजीवी/आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने पर पात्र परिवारों को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, लेकिन अनेक मामलों में स्वीकृति मिलने के बावजूद लाभार्थियों को राशि जारी नहीं की गई है। उनका कहना है कि इससे पहले से दुख की स्थिति में मौजूद परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनधारकों की समस्याओं का उठाया मुद्दा

पूर्व मुख्यमंत्री ने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के लंबित भुगतानों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जीपीएफ, ग्रुप इंश्योरेंस, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट जैसी देय राशि रिटायरमेंट के कई महीने बाद भी नहीं मिल रही है, जबकि यह कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है। इसके अलावा उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन में हो रही देरी का भी जिक्र करते हुए कहा कि इससे बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग लाभार्थियों को गंभीर आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

विकास कार्यों और ठेकेदारों पर भी पड़ रहा असर

गहलोत ने पत्र में यह भी लिखा कि ट्रेजरी से स्वीकृत हो चुके बिलों का भुगतान समय पर नहीं होने के कारण सड़क, पेयजल, सार्वजनिक निर्माण और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं की गति प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि कई छोटे ठेकेदार अपने बकाया भुगतान की मांग को लेकर सार्वजनिक विज्ञापन जारी करने तक को मजबूर हो गए हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, बल्कि उनके साथ जुड़े श्रमिकों और रोजगार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी का मामला नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया कि राज्य की भुगतान व्यवस्था को शीघ्र सामान्य बनाया जाए और सभी विभागों तथा योजनाओं में लंबित देय राशि का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी एवं निर्णायक कदम उठाए जाएं।