कुत्तों का कहर: डेढ़ महीने के मासूम को नोचा, आंतें बाहर आईं; मां ने 5 मिनट तक संघर्ष कर बच्चे को ढककर बचाई जान

अजमेर जिले से करीब 40 किलोमीटर दूर पीसांगन क्षेत्र के कालेसरा गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां आवारा कुत्तों ने डेढ़ महीने के मासूम पर हमला कर उसकी जिंदगी को खतरे में डाल दिया। 24 अप्रैल की रात हुई इस भयावह घटना में मासूम गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। उसे तत्काल इलाज के लिए अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने में जुटी हुई है।

बताया जा रहा है कि घटना उस समय हुई जब परिवार अपनी झोपड़ी में सो रहा था। मां बाहर खाना बनाने में व्यस्त थी, जबकि झोपड़ी के अंदर उसका डेढ़ महीने का बेटा सावरा और तीन साल का बड़ा बेटा अरविंद सो रहे थे। इसी दौरान अंधेरे का फायदा उठाकर कुछ आवारा कुत्ते झोपड़ी में घुस आए और सीधे छोटे बच्चे पर हमला बोल दिया। कुत्तों ने मासूम को बुरी तरह नोच डाला, जिससे उसकी आंतें तक बाहर आ गईं।

मां केलम (30) ने बताया कि जैसे ही उसे बच्चे के जोर-जोर से रोने की आवाज सुनाई दी, वह तुरंत झोपड़ी के अंदर दौड़ी। अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। कई कुत्ते उसके बच्चे को घेरकर हमला कर रहे थे और एक कुत्ता उसे मुंह में दबाए हुए था। केलम ने हिम्मत जुटाते हुए करीब पांच मिनट तक कुत्तों से संघर्ष किया। आखिरकार उसने बच्चे को कुत्तों के जबड़े से छुड़ाया और उसकी रक्षा के लिए खुद उसके ऊपर लेट गई। इसके बाद ही कुत्ते वहां से भागे।
परिजनों के अनुसार, झोपड़ी में मौजूद तीन साल का बड़ा बेटा अरविंद इस हमले से बाल-बाल बच गया। उसने खुद को कंबल से पूरी तरह ढक रखा था, जिसकी वजह से कुत्तों की नजर उस पर नहीं पड़ी और वह सुरक्षित रहा।

घटना की सूचना मिलते ही बच्चे के पिता मकरम तुरंत गांव पहुंचे और किराए की गाड़ी से बच्चे को अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर आए। डॉक्टरों ने रात में ही प्राथमिक उपचार और सर्जरी कर उसकी जान बचाने की कोशिश की। फिलहाल बच्चे की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।

अस्पताल प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। प्रिंसिपल डॉ. अनिल सामरिया ने जानकारी दी कि बच्चे की स्थिति नाजुक है और वह कोमा में है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है। डॉ. गरिमा अरोड़ा के नेतृत्व में गठित टीम 24 घंटे बच्चे की हालत पर नजर बनाए हुए है। डॉक्टरों का कहना है कि जैसे ही बच्चे की स्थिति स्थिर होगी और उसे होश आएगा, आगे की सर्जरी की योजना बनाई जाएगी।