पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही संगठनात्मक खींचतान के बीच प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे की खबर सामने आई है। पार्टी नेतृत्व की ओर से राज्य संगठन में बदलाव की तैयारी के संकेत पहले से मिल रहे थे और अब वड़िंग के पद छोड़ने के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन का फैसला किया है और नए अध्यक्ष के नाम को लेकर कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं।
वड़िंग के इस्तीफे का घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस के सामने राज्य संगठन को चुनावी तैयारी के लिए सक्रिय करने की चुनौती है। पार्टी के भीतर पिछले कई महीनों से प्रदेश नेतृत्व को लेकर अलग-अलग नेताओं और गुटों के बीच मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर में कांग्रेस ने पंजाब के लिए अपने प्रभारी में भी बदलाव किया था और सचिन पायलट को यह जिम्मेदारी दी गई थी।
राजा वड़िंग के पद को लेकर लंबे समय से चर्चाराजा वड़िंग के नेतृत्व में बदलाव को लेकर कांग्रेस के भीतर कई सप्ताह से चर्चा चल रही थी। जून में पार्टी के तत्कालीन पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज किया था और कहा था कि 2027 का चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा। उस समय संभावित बदलाव को लेकर विजय इंदर सिंगला, चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया और राणा केपी सिंह जैसे नामों की चर्चा हो रही थी।
इसके बाद पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर खींचतान बनी रही। सितंबर में कांग्रेस आलाकमान ने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया। इसके बाद प्रदेश संगठन में संभावित बदलाव की चर्चा और तेज हो गई।
वड़िंग ने क्या कहा?राजा वड़िंग की ओर से इस घटनाक्रम पर तत्काल विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने अपने पद से इस्तीफा आलाकमान को भेज दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने भी पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर बदलाव का फैसला कर लिया था।
वड़िंग को लेकर पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग पहले भी उठती रही थी। हालांकि जुलाई में वड़िंग ने गुटबाजी की अटकलों को खारिज करते हुए कहा था कि पार्टी के वरिष्ठ नेता एक साथ हैं और 2027 के चुनाव में कांग्रेस को मजबूत करने का लक्ष्य है। उन्होंने चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई वरिष्ठ नेताओं को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण बताया था।
नए प्रदेश अध्यक्ष की रेस में कौन-कौन?राजा वड़िंग के बाद पंजाब कांग्रेस की कमान किसे मिलेगी, इसे लेकर अभी कई नाम चर्चा में हैं। इनमें पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय इंदर सिंगला का नाम प्रमुखता से सामने आया है। उनके अलावा गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, जालंधर के विधायक प्रगट सिंह और अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम भी संभावित दावेदारों के तौर पर चर्चा में हैं। हालिया रिपोर्टों में अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला और राजा सांसी से विधायक सुखबिंदर सिंह सरकारिया का नाम भी सामने आया है।
विजय इंदर सिंगला को लेकर चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी के भीतर उन्हें संभावित हिंदू चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान को करना है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अंतिम नाम को लेकर राहुल गांधी के अलावा किसी को निश्चित जानकारी नहीं है और उनके सामने संभावित नामों का पैनल रखा गया है।
चन्नी और रंधावा का नाम भी चर्चा मेंपंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक समीकरणों में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम भी लगातार चर्चा में रहा है। चन्नी और वड़िंग के बीच प्रदेश नेतृत्व को लेकर मतभेदों की खबरें पहले सामने आती रही हैं। हालांकि जुलाई में वड़िंग ने चन्नी के साथ अपने संबंधों को लेकर सार्वजनिक रूप से सकारात्मक रुख अपनाया था और उन्हें पार्टी का वरिष्ठ नेता और अपना भाई बताया था।
रंधावा भी पहले वड़िंग के नेतृत्व को लेकर सवाल उठा चुके हैं। सितंबर में उनके रुख में नरमी के संकेत दिखाई दिए थे और उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अपने पहले के रुख से अलग स्थिति अपनाई थी।
संगठन में बदलाव की वजह क्या?पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के पीछे लंबे समय से चल रही संगठनात्मक खींचतान एक प्रमुख मुद्दा रही है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पंजाब के नए प्रभारी सचिन पायलट ने राज्य संगठन को लेकर नेताओं और जिला स्तर के पदाधिकारियों से बातचीत की थी। इन बैठकों से मिले संगठनात्मक फीडबैक पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ चर्चा हुई थी।
इससे पहले भी कांग्रेस ने पंजाब संगठन में अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारियां देकर विभिन्न गुटों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की थी। वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखते हुए चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान से जुड़ी जिम्मेदारी और विजय इंदर सिंगला तथा सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत अन्य नेताओं को संगठन में भूमिकाएं दी गई थीं। इसके बावजूद प्रदेश नेतृत्व को लेकर विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
अब निगाह नए अध्यक्ष के नाम परराजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस पंजाब की कमान किस नेता को सौंपती है। संभावित नामों में अलग-अलग क्षेत्रों और राजनीतिक समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता शामिल हैं। ऐसे में अंतिम चयन कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर निर्भर करेगा। फिलहाल विजय इंदर सिंगला, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रगट सिंह, गुरजीत सिंह औजला और सुखबिंदर सिंह सरकारिया समेत कई नाम चर्चा में हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह बदलाव पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालांकि नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद संगठन के भीतर मौजूद मतभेद किस तरह सुलझते हैं और पार्टी चुनावी तैयारियों को किस दिशा में आगे बढ़ाती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।