आज 4 घंटे के लिए बंद रहेंगे पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के द्वार, जानिए बनकलागी नीति का रहस्य

ओडिशा के पुरी में स्थित विश्वविख्यात श्री जगन्नाथ मंदिर में बुधवार की शाम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था कुछ समय के लिए रोक दी जाएगी। मंदिर प्रशासन की ओर से जारी सूचना के अनुसार, मंदिर में होने वाले विशेष धार्मिक अनुष्ठान बनकलागी नीति के कारण आम भक्तों को लगभग चार घंटे तक भगवान जगन्नाथ के दर्शन नहीं मिल पाएंगे। इस दौरान मंदिर के सभी मुख्य द्वार बंद रहेंगे और केवल सेवायतों को ही भीतर प्रवेश की अनुमति होगी।

शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक बंद रहेंगे मंदिर के कपाट

मंदिर प्रशासन ने बताया कि यह पवित्र अनुष्ठान फाल्गुन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि, यानी आज बुधवार को संपन्न किया जाएगा। परंपरा के अनुसार, दूसरे भोगमंडप भोग के पश्चात शाम करीब 6 बजे से रात 10 बजे तक मंदिर में आम दर्शन पूरी तरह बंद रहेंगे। इस अवधि में श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

क्या है बनकलागी नीति और क्यों होती है इतनी विशेष?


श्री जगन्नाथ मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार बनकलागी नीति एक अत्यंत गोपनीय और पवित्र अनुष्ठान माना जाता है। यह अनुष्ठान केवल दत्त महापात्र सेवायतों द्वारा रत्न बेदी पर किया जाता है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, प्रभु बलभद्र, देवी सुभद्रा और प्रभु सुदर्शन के श्रीमुख का विशेष रूप से श्रृंगार किया जाता है।

बनकलागी नीति के समय किसी भी प्रकार का कृत्रिम रंग या सामग्री प्रयोग में नहीं लाई जाती। श्रृंगार के लिए लाल, पीले, सफेद और काले रंग के प्राकृतिक फूलों और पदार्थों का उपयोग होता है। इसके साथ ही केसर को कपूर और कस्तूरी के साथ मिलाकर देवताओं के मुख पर लगाया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय होती है, इसी कारण इस दौरान किसी भी श्रद्धालु को दर्शन की अनुमति नहीं दी जाती।

अनुष्ठान के बाद फिर सामान्य होगी दर्शन व्यवस्था

बनकलागी नीति के समापन के पश्चात देवताओं का विशेष स्नान कराया जाता है। इसके बाद मंदिर के सभी द्वार पुनः खोल दिए जाते हैं और दर्शन व्यवस्था पहले की तरह सामान्य रूप से शुरू कर दी जाती है। श्रद्धालु रात के समय फिर से भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सकते हैं।

महीने में दो बार निभाई जाती है यह परंपरा

मंदिर परंपरा के अनुसार बनकलागी नीति का आयोजन हर महीने लगभग दो बार किया जाता है और यह अनुष्ठान हमेशा बुधवार के दिन ही संपन्न होता है। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में सख्त नियम लागू रहते हैं और सभी द्वार बंद रखे जाते हैं।

मंदिर प्रशासन ने बुधवार को पुरी आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजना इस व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बनाएं और अनुष्ठान के दौरान प्रशासन का सहयोग करें, ताकि यह पवित्र प्रक्रिया शांतिपूर्ण और विधिपूर्वक संपन्न हो सके।