ओडिशा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत विजिलेंस विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रायगड़ा ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर) प्रसन्न कुमार पटनायक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी इंजीनियर को 2 लाख रुपये की घूस स्वीकार करते समय पकड़ा गया। खास बात यह है कि प्रसन्न कुमार पटनायक महज छह दिन बाद, यानी 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन रिटायरमेंट से ठीक पहले ही वह विजिलेंस विभाग की कार्रवाई के शिकंजे में आ गए।
indiatv की खबर के अनुसार, मामले की शुरुआत एक ठेकेदार की शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसने विभाग के लिए कई विकास कार्य पूरे किए थे, लेकिन उसके लगभग 50 लाख रुपये के भुगतान लंबे समय से लंबित पड़े हुए थे। इसके अलावा आगामी सरकारी निविदाओं में हिस्सा लेने के लिए उसे विभाग से कार्य अनुभव प्रमाणपत्र (वर्क एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट) की भी आवश्यकता थी। ठेकेदार का कहना था कि इन दोनों कामों के बदले अधिकारी लगातार रिश्वत की मांग कर रहे थे।
शिकायत के अनुसार प्रसन्न कुमार पटनायक ने पहले 2.5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। आरोप है कि उन्होंने लंबित बिलों के भुगतान को मंजूरी देने और अनुभव प्रमाणपत्र जारी करने के एवज में यह रकम तय की थी। जब ठेकेदार ने इतनी बड़ी राशि देने में असमर्थता जताई, तब दोनों के बीच बातचीत के बाद कथित तौर पर रिश्वत की रकम घटाकर 2 लाख रुपये कर दी गई।
लगातार दबाव और रिश्वत की मांग से परेशान होकर ठेकेदार ने पूरे मामले की जानकारी विजिलेंस विभाग को दी। शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने इसकी प्रारंभिक जांच की और फिर आरोपी को पकड़ने के लिए सुनियोजित ट्रैप तैयार किया। योजना के तहत जैसे ही ठेकेदार ने अभियंता को 2 लाख रुपये सौंपे, पहले से मौजूद विजिलेंस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
कार्रवाई के दौरान विजिलेंस अधिकारियों ने आरोपी के पास से पूरी रिश्वत राशि बरामद कर जब्त कर ली। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी शुरू कर दी। अधिकारियों का मानना है कि आरोपी की आय और संपत्तियों की गहन जांच से कई अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
इसी दौरान जांच टीम जब भुवनेश्वर के नंदन विहार स्थित बसुंधरा कॉलोनी में मौजूद अभियंता के आवास पर पहुंची तो वहां की भव्यता देखकर अधिकारी भी चौंक गए। शहर के प्रमुख रिहायशी इलाके में बने इस आलीशान मकान की सबसे खास बात उसकी छत पर निर्मित स्विमिंग पूल बताई जा रही है। विजिलेंस विभाग अब इस संपत्ति की लागत, निर्माण संबंधी विवरण और धन के स्रोत की विस्तृत जांच कर रहा है।
छापेमारी केवल भुवनेश्वर तक सीमित नहीं रही। विजिलेंस टीम ने नयागढ़ स्थित पैतृक घर, रायगड़ा में मौजूद सरकारी आवास और अभियंता के कार्यालय कक्ष में भी तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान रायगड़ा स्थित सरकारी क्वार्टर से 3.39 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। पहले जब्त किए गए 2 लाख रुपये की रिश्वत राशि को जोड़ने पर अब तक कुल 5.39 लाख रुपये नकद बरामद हो चुके हैं।
विजिलेंस विभाग ने इस मामले में कोरापुट विजिलेंस थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और अभियंता की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश, आय के स्रोतों तथा अन्य वित्तीय लेन-देन की भी विस्तार से जांच की जाएगी। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति या अन्य अनियमितताओं के प्रमाण मिलते हैं तो आगे और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सेवानिवृत्ति से ठीक पहले हुई इस गिरफ्तारी ने सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। आम लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की नजर विजिलेंस विभाग की जांच पर टिकी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं, जो आरोपी अधिकारी की संपत्तियों और कथित वित्तीय गतिविधियों पर नई रोशनी डाल सकते हैं।