शिवसेना (UBT) में लगातार जारी राजनीतिक उथल-पुथल और आंतरिक खींचतान के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक बड़ा और भावनात्मक बयान दिया है। मुंबई में शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि यदि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का उन पर भरोसा नहीं है, तो वे अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अपने भाषण में उन्होंने समर्थकों और शिवसैनिकों के सामने भावुक होते हुए यह बात कई बार दोहराई।
उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को अपने संबोधन में कहा कि यदि संगठन के लोग मानते हैं कि वे शिवसेना प्रमुख के रूप में उपयुक्त नहीं हैं, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के पद से हटने को तैयार हैं। उन्होंने आगे यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी सक्षम व्यक्ति को पार्टी की कमान सौंपने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे संघर्ष से पीछे हटने वाले व्यक्ति नहीं हैं, लेकिन जिस दिन कार्यकर्ताओं को लगेगा कि वे इस जिम्मेदारी के योग्य नहीं हैं, उसी दिन वे पद छोड़ देंगे।
इसी दौरान उद्धव ठाकरे ने शिंदे गुट, बीजेपी और बागी सांसदों पर तीखा प्रहार भी किया। उन्होंने कहा, “आप सभी जानते हैं मैं कैसा व्यक्ति हूं। अगर मेरा कोई भी साथी मेरे खिलाफ एक उंगली भी उठाएगा तो मैं एक पल भी पद पर नहीं रहूंगा। इसी वजह से मैंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा था। अगर मुझे सत्ता ही चाहिए होती तो मैं विधानसभा में बैठा रहता। मैं पिछले कई वर्षों से नेतृत्व कर रहा हूं, और यदि मुझ पर लगाए गए आरोप सही हैं, तो मैं तुरंत पद छोड़ने को तैयार हूं।”
मैं किसी भी तूफान में डिगने वाला नहीं हूं: उद्धव ठाकरेअपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए खुद को संघर्षशील बताते हुए कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का नेतृत्व किसी भी शिवसैनिक को सौंपा जा सकता है, और शिवसेना किसी भी “गलत हाथों” में नहीं जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “कोई भी शिवसैनिक आगे आकर पार्टी की जिम्मेदारी संभाल सकता है। यह हमारी विरासत किसी ऐसे व्यक्ति के हाथ में नहीं जानी चाहिए जो इसके मूल सिद्धांतों से समझौता करे। अगर कोई कमजोर या गलत सोच वाला व्यक्ति मुझ पर आरोप लगाता है, तो उसका जवाब देना कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है। मैं किसी भी स्थिति में पद छोड़ने को तैयार हूं।”
उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि वे न तो टूटे हैं और न ही हताश हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई राजनीतिक संकट आए, कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन वे पीछे हटने वालों में से नहीं हैं। उन्होंने खुद को “पहाड़ की तरह मजबूत” बताते हुए कहा कि वे हर जिम्मेदारी निभाते रहेंगे, लेकिन यह सब केवल तब तक, जब तक कार्यकर्ताओं का विश्वास उनके साथ है।
30 साल के गठबंधन के बाद भी पार्टी का विलय नहीं कियाशिवसेना में विभाजन और कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी उद्धव ठाकरे ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जब पार्टी ने 30 वर्षों तक बीजेपी के साथ गठबंधन बनाए रखने के बावजूद शिवसेना का विलय नहीं किया, तो अब कांग्रेस में विलय का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ लोग यह सोचकर भ्रम फैला रहे हैं कि पार्टी कमजोर हो रही है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। उनके अनुसार, शिवसैनिकों का उत्साह कम नहीं हुआ है बल्कि और अधिक बढ़ा है। उन्होंने कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में हार मानने वाले नहीं हैं और लगातार जनता के बीच जाकर संगठन को मजबूत कर रहे हैं।
उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा कि यदि वे कार्यकर्ताओं से संवाद न करें या पूरे महाराष्ट्र का दौरा न करें, तो चुनावी सफलता संभव नहीं है। इसलिए संगठन को लगातार सक्रिय और जनता से जुड़ा रहना जरूरी है।
शिवसेना विलय के लिए नहीं, संघर्ष के लिए बनी हैअपने संबोधन के अंतिम हिस्से में उद्धव ठाकरे ने पार्टी की वैचारिक नींव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश धीरे-धीरे “एक पार्टी, बिना चुनाव” जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहा है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की असली ताकत उसके चुनावी प्रदर्शन से तय होती है। इस दौरान उन्होंने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री इंद्रजीत गुप्ता का उल्लेख करते हुए बालासाहेब ठाकरे के विचारों को भी याद किया। उद्धव ठाकरे ने कहा कि बालासाहेब का मानना था कि सत्ता उनका लक्ष्य नहीं है और सरकार गिरने या बनने से उनके सिद्धांत नहीं बदलते।
उन्होंने दोहराया कि शिवसेना कभी भी किसी अन्य पार्टी में विलय के लिए नहीं बनी। यह पार्टी मराठी अस्मिता, हिंदुत्व की रक्षा और न्याय की लड़ाई के लिए स्थापित की गई थी।