सड़क हादसे में बाल-बाल बचीं सुप्रिया सुले, हादसे के बाद बोलीं—'डरावना अनुभव रहा'

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) से जुड़ी नेता और बारामती लोकसभा क्षेत्र से सांसद सुप्रिया सुले शनिवार को एक गंभीर सड़क हादसे में बाल-बाल बच गईं। यह घटना उस समय हुई जब वह पुणे से मुंबई की ओर अपनी यात्रा पर जा रही थीं। हादसे के बाद उन्होंने उस वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर भी सार्वजनिक रूप से साझा किया, जिसने उनकी कार को टक्कर मारी थी।

जानकारी के अनुसार, सुप्रिया सुले उस समय मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर सफर कर रही थीं। तभी अचानक एक अन्य वाहन ने असावधानीपूर्वक और तेज गति से उनकी कार को साइड से जोरदार टक्कर मार दी। इस पूरी घटना का विवरण उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते हुए लिखा कि पुणे से मुंबई जाते समय हाईवे पर उन्हें एक बेहद भयावह अनुभव का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि वाहन नंबर GJ13CF5257 ने लापरवाही से ड्राइविंग करते हुए उनकी गाड़ी को साइड से टक्कर मार दी, जिससे स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई।

उन्होंने आगे लिखा कि सौभाग्य से इस हादसे में किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई और सभी लोग सुरक्षित हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि सड़क पर तेज रफ्तार और गैर-जिम्मेदाराना ड्राइविंग कितनी बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि हर कोई सीट बेल्ट का उपयोग करे, पूरी सतर्कता बरते और जिम्मेदारी के साथ वाहन चलाए, ताकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा सभी के लिए सुरक्षित बनी रहे।
लगातार चार बार बारामती की प्रतिनिधि, राजनीतिक सफर रहा प्रभावशाली

सुप्रिया सुले का राजनीतिक जीवन वर्ष 2006 में शुरू हुआ, जब उन्हें पहली बार राज्यसभा के लिए चुना गया था। इसके बाद वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपने पिता और वरिष्ठ नेता Sharad Pawar की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए बारामती लोकसभा सीट से जीत हासिल की। तब से लेकर अब तक वह लगातार चार बार इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ बनी हुई है।

एक सांसद के रूप में सुप्रिया सुले की पहचान उनकी सक्रियता, संसदीय बहसों में प्रभावी भागीदारी और विकास से जुड़े मुद्दों पर मजबूत उपस्थिति के लिए होती है। संसद में उनके प्रदर्शन को कई बार सराहा गया है और उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें ‘संसद रत्न’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उनकी राजनीतिक यात्रा को एक सशक्त और प्रभावशाली जनप्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने बारामती क्षेत्र में लगातार अपनी उपस्थिति और प्रभाव बनाए रखा है।