E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया है। शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान राउत ने आरोप लगाया कि नितिन गडकरी की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश किसी विपक्षी दल या बाहरी ताकत की ओर से नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर से ही की जा रही है। उनका कहना है कि पार्टी के कुछ प्रभावशाली नेता गडकरी को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
संजय राउत ने कहा कि नितिन गडकरी को लेकर जनता के बीच जो भी भ्रम और विवाद पैदा किए जा रहे हैं, उसके पीछे भाजपा के ही कुछ नेताओं की भूमिका है। उन्होंने दावा किया कि गडकरी को योजनाबद्ध तरीके से ऐसे विवादों में घसीटा जा रहा है ताकि उनकी लोकप्रियता पर असर पड़े। राउत ने कहा, गडकरी साहब को लेकर जो माहौल बनाया जा रहा है, उसके पीछे बाहरी लोग नहीं बल्कि उनकी अपनी पार्टी के लोग हैं। उन्हें किसी न किसी तरह राजनीतिक जाल में फंसाने की कोशिश की जा रही है।
2014 का जिक्र करते हुए लगाया साजिश का आरोपराउत ने अपने दावों के समर्थन में वर्ष 2014 से पहले की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब उस समय नितिन गडकरी को भाजपा अध्यक्ष के रूप में दूसरा कार्यकाल देने की चर्चा चल रही थी, तब भी उनके खिलाफ इसी तरह का माहौल तैयार करने की कोशिश हुई थी। उनके मुताबिक, उस समय भी गडकरी को विवादों में घेरने का प्रयास किया गया था ताकि उनका राजनीतिक कद सीमित किया जा सके।
उन्होंने आगे कहा कि नितिन गडकरी अपनी लोकप्रियता और प्रशासनिक छवि के कारण भविष्य में प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदार माने जाते रहे हैं। इसी वजह से कुछ लोग उनकी साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। राउत ने दावा किया कि पार्टी के अंदर मौजूद लोग ही चाहते हैं कि गडकरी की सार्वजनिक छवि धूमिल हो जाए, जिससे उनकी स्वीकार्यता कम हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि गडकरी स्वयं भी इन परिस्थितियों से पूरी तरह अनजान नहीं हैं।
आखिर E20 पेट्रोल को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?इन दिनों नितिन गडकरी E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के कारण लगातार सुर्खियों में हैं। केंद्र सरकार ने देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E20 फ्यूल को बढ़ावा देने और चरणबद्ध तरीके से लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। सरकार का कहना है कि इससे पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा और एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि इस फैसले को लेकर कई वाहन मालिकों और उपभोक्ताओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ गाड़ियों के माइलेज में कमी महसूस हो रही है और पुरानी गाड़ियों के इंजन पर इसके संभावित असर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों का आरोप है कि उन्हें बिना पर्याप्त विकल्प के इस ईंधन को अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
इसी विवाद के बीच नितिन गडकरी ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि E20 फ्यूल से वाहनों को कोई नुकसान नहीं होता और इसके समर्थन में उन्होंने कई बार विशेषज्ञों और ऑटोमोबाइल कंपनियों की राय का हवाला भी दिया है। हालांकि, इस मुद्दे पर बहस अभी भी जारी है और विपक्ष लगातार सरकार की नीति के साथ-साथ गडकरी की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहा है। वहीं, कुछ राजनीतिक हलकों में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस पूरे विवाद के पीछे उनके निजी हित जुड़े होने के दावे किए जा रहे हैं, हालांकि इन आरोपों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।