महाराष्ट्र की सियासत में शिवसेना के भीतर चल रहा घमासान एक बार फिर नए और दिलचस्प मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। एकनाथ शिंदे गुट द्वारा चलाए जा रहे कथित 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर अब उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना यूबीटी) ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यूबीटी खेमे का दावा है कि लोकसभा स्पीकर को अलग गुट की मान्यता के लिए भेजे गए पत्र पर बागी माने जा रहे छह सांसदों में से दो ने हस्ताक्षर ही नहीं किए हैं। वहीं दूसरी ओर शिंदे गुट से जुड़े सूत्र इस पूरे मामले को खारिज करते हुए दावा कर रहे हैं कि 'ऑपरेशन टाइगर' लगभग पूरा हो चुका है और सिर्फ आधिकारिक घोषणा शेष है।
उद्धव गुट की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि जिन दो सांसदों के हस्ताक्षर को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उनमें धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर और मुंबई नॉर्थ ईस्ट से सांसद संजय पाटिल का नाम सामने आ रहा है। यूबीटी का आरोप है कि इन दोनों ने उस पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए, जिसे अलग गुट के दावे के लिए आधार बनाया गया है। हालांकि, इन दोनों सांसदों का कहना है कि वे उस दिन दिल्ली में मौजूद ही नहीं थे, जिससे इस पूरे घटनाक्रम पर और भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मुंबई के अरविंद सावंत और अनिल देसाई तथा नासिक के राजाभाऊ वाजे को छोड़कर अन्य सांसदों के शिंदे गुट के साथ जाने की चर्चा भी तेज हो गई है।
इस पूरे विवाद पर संजय पाटिल ने सफाई देते हुए कहा कि वह फिलहाल मुंबई में ही हैं और उनके नाम को लेकर फैल रही अटकलों से वह परेशान हो चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई राजनीतिक बदलाव होगा तो वह अपने समय पर सामने आ जाएगा, लेकिन उन्हें किसी भी तरह की खेमेबाजी का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। पाटिल ने यह भी कहा कि न तो उन्हें शिंदे गुट की ओर से कोई आमंत्रण मिला है और न ही वह किसी अन्य सांसद के संपर्क में हैं। वहीं ओमराजे निंबालकर ने भी संकेत दिए हैं कि वह 20 जून के बाद ही अपना रुख सार्वजनिक करेंगे, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ गई है।
उधर, उद्धव ठाकरे गुट ने अपने सांसदों की एकजुटता दिखाने के लिए दिल्ली में अहम बैठक बुलाने का फैसला किया है। इस बैठक के लिए बाकायदा व्हिप जारी किया गया है और इसे पार्टी के लिए शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि इस बैठक में तीन से अधिक लोकसभा सांसद शामिल होंगे, जो शिंदे गुट के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो शिंदे गुट के लिए दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा जुटाना मुश्किल हो जाएगा, जो किसी भी अलग गुट की मान्यता के लिए जरूरी माना जाता है।
इस बीच राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत ने शिंदे गुट पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सांसदों को पाला बदलने के लिए 50-50 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है, जिसमें 15 करोड़ रुपये एडवांस के तौर पर दिए जाने की बात कही जा रही है। राउत ने यह भी आरोप लगाया कि धाराशिव सांसद ओमराजे निंबालकर पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने पुराने एक आपराधिक मामले का भी जिक्र करते हुए कहा कि यह दबाव राजनीतिक लाभ के लिए बनाया जा रहा है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर भी इस राजनीतिक टकराव की गूंज देखने को मिली। संजय राउत ने 'एक्स' पर एक पोस्ट करते हुए आरोप लगाया था कि विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त के लिए करोड़ों रुपये का खेल चल रहा है। इस पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने व्यंग्य करते हुए प्रतिक्रिया दी और राजनीतिक दलों के बीच 'रेट कार्ड' जैसी तुलना पर तंज कसा। उन्होंने अलग-अलग रकम का उल्लेख करते हुए इसे राजनीतिक सौदेबाज़ी करार दिया। इसके जवाब में संजय राउत ने भी पलटवार करते हुए कहा कि हर सांसद की कीमत को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं, वह पूरी तरह राजनीतिक नैतिकता पर सवाल उठाती हैं और यह पूरा घटनाक्रम लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।