महाराष्ट्र की राजनीति में जारी सियासी उठापटक के बीच उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस समारोह में विपक्षी खेमे पर जमकर निशाना साधा। शुक्रवार (19 जून) को आयोजित कार्यक्रम में शिंदे ने न सिर्फ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) पर हमला बोला, बल्कि आने वाले समय में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम होने के भी संकेत दिए।
अपने संबोधन के दौरान शिंदे ने कहा कि जो कुछ अभी दिखाई दे रहा है, वह सिर्फ शुरुआत है। उन्होंने कहा, अभी तो लोगों ने सिर्फ ट्रेलर देखा है, असली कहानी और बड़े घटनाक्रम अभी सामने आने बाकी हैं। उन्होंने मंच से समर्थकों की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज एक शेर उनके सामने खड़ा है, जबकि कुछ लोग सिर्फ दूर बैठकर शोर मचाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग समूह बनाकर आवाज उठाने की कोशिश करते हैं, वे यह भूल जाते हैं कि ताकत भीड़ में नहीं बल्कि नेतृत्व और साहस में होती है। शेर को अपनी ताकत साबित करने के लिए झुंड की जरूरत नहीं पड़ती, वह अकेले ही अपना रास्ता बनाता है, शिंदे ने कहा।
संभावित दलबदल को लेकर विरोधियों पर साधा निशानापार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शिंदे ने उन नेताओं को भी जवाब दिया जो हाल के दिनों में संभावित राजनीतिक बदलाव और दलबदल की चर्चाओं को लेकर उन पर लगातार हमला बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग लगातार यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे क्या होने वाला है और कौन किसके साथ खड़ा दिखाई देगा।
बिना किसी का नाम लिए उन्होंने शिवसेना (UBT) की ओर से दी जा रही चेतावनियों और बयानों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं की भाषा और बयानबाजी से ऐसा लगता है जैसे वे राजनीतिक बहस नहीं बल्कि धमकी की राजनीति कर रहे हों।
'ऑपरेशन तुड़वा' की चेतावनी पर दिया जवाबहाल के दिनों में उद्धव गुट की ओर से कथित तौर पर ऑपरेशन तुड़वा जैसे शब्दों का इस्तेमाल किए जाने पर भी शिंदे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन हकीकत में उनके पास ऐसा करने की क्षमता नहीं है।
राज्यसभा सांसद संजय राउत का नाम लिए बिना शिंदे ने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग खुद को बहुत बड़ा रणनीतिकार और सर्जन समझते हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, जो लोग ऑपरेशन की बातें करते हैं, पहले उन्हें यह समझना चाहिए कि ऑपरेशन करना हर किसी के बस की बात नहीं होती।
उन्होंने आगे कहा, एक कंपाउंडर खुद को डॉक्टर समझने लगे तो उससे बड़ा मजाक कुछ नहीं हो सकता। यहां असली डॉक्टर कौन है, यह सभी जानते हैं। और जहां तक ऑपरेशन की बात है, उसके लिए सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि शेर जैसा साहस भी चाहिए होता है।
2022 की बगावत का किया जिक्रअपने भाषण के दौरान एकनाथ शिंदे ने वर्ष 2022 में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों को भी याद किया, जब उन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर अलग रास्ता चुना था। उन्होंने दावा किया कि उस समय भी उन्हें लगातार धमकियां दी गई थीं और डराने की कोशिश की गई थी।
शिंदे ने कहा कि उनसे कहा गया था कि अगर वे मुंबई लौटेंगे तो उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन उन्होंने किसी भी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
उन्होंने बताया, मैं अकेले सड़क मार्ग से मुंबई आया था। मैंने किसी विशेष व्यवस्था या हेलीकॉप्टर का सहारा नहीं लिया। जिन लोगों ने मुझे डराने की कोशिश की थी, वे उस समय घरों में बैठकर सिर्फ घटनाक्रम देखते रह गए थे।
विरोधियों को खुली चुनौतीडिप्टी सीएम ने कहा कि राजनीति में सिर्फ बयान देने से कुछ नहीं होता, बल्कि मैदान में उतरकर ताकत दिखानी पड़ती है। उन्होंने वरिष्ठ नेता रामदास कदम की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि कोई उनके गुट के खिलाफ अभियान चलाने की बात करता है तो उसे पहले अपने कार्यकर्ताओं की क्षमता भी देख लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनके साथ जुड़े शिवसैनिक केवल नारे लगाने वाले कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि वे बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को पूरी निष्ठा के साथ मानने वाले लोग हैं। शिंदे ने दावा किया कि उनके समर्थक किसी भी राजनीतिक चुनौती का जवाब देने की क्षमता रखते हैं।
अपने भाषण के अंत में उन्होंने एक बार फिर यह दोहराया कि शिवसेना की असली ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ताओं में है और वही आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करेंगे। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में कई ऐसे घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं, जो मौजूदा समीकरणों को पूरी तरह बदल दें।