उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत निर्णायक स्थिति तक नहीं पहुंच पाई है। इसी बीच प्रदेश की कुछ छोटी पार्टियों और क्षेत्रीय नेताओं का झुकाव कांग्रेस की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इनमें ऐसे नेता भी शामिल हैं, जो पहले समाजवादी पार्टी के साथ राजनीतिक रूप से जुड़े रहे हैं। राहुल गांधी से मुलाकातों और कांग्रेस नेताओं के साथ बढ़ते संपर्क ने यूपी के राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सबसे बड़ा मतभेद सीटों की संख्या को लेकर सामने आ रहा है। समाजवादी पार्टी अपने मजबूत जनाधार के आधार पर अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। दूसरी ओर कांग्रेस आधी सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है। कांग्रेस का तर्क है कि अगर उसे पर्याप्त सीटों पर चुनाव लड़ने का अवसर ही नहीं मिलेगा तो पार्टी अपनी चुनावी ताकत को कैसे साबित करेगी।
राहुल गांधी के संपर्क में छोटे दलों के नेतासीट बंटवारे पर कांग्रेस और सपा के बीच बातचीत के बीच कुछ क्षेत्रीय नेता कांग्रेस नेतृत्व के संपर्क में हैं। अपनी जनता पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्य और संजय चौहान ने राहुल गांधी से मुलाकात की है। संजय चौहान की ओबीसी चौहान समुदाय में अच्छी पकड़ मानी जाती है।
इसी तरह अपना दल कामेरवादी के पंकज निरंजन भी कांग्रेस नेताओं से कई बार मुलाकात कर चुके हैं। खास बात यह है कि पंकज निरंजन उस भागीदारी मोर्चे के संस्थापकों में शामिल रहे हैं, जो 2022 से पहले बनाया गया था। reference material के मुताबिक, उस दौर में जिन छोटी पार्टियों का रुख समाजवादी पार्टी की ओर था, उनमें से कुछ अब कांग्रेस को विकल्प के तौर पर देख रही हैं।
कांग्रेस की 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारीउत्तर प्रदेश में कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने समाजवादी पार्टी के साथ हुई बैठक में बड़ी संख्या में सीटों की मांग रखी है। उनका कहना है कि कांग्रेस करीब आधी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। गौतम के मुताबिक, 150 सीटों की चर्चा तक सीमित रहने के बजाय कांग्रेस 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी कर रही है और जमीनी स्तर पर पार्टी का काम लगभग पूरा हो चुका है। उनके अनुसार, गुरुवार तक जिलों और शहरों की कांग्रेस इकाइयों को भी अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
हालांकि कांग्रेस आधी सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है, लेकिन गौतम ने यह भी कहा कि बातचीत के आधार पर जरूरी समझौता किया जा सकता है। इससे संकेत मिलता है कि अंतिम सीट बंटवारे में बातचीत की गुंजाइश बनी हुई है।
अखिलेश यादव के रुख से छोटे दलों को क्या संदेश?दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे दलों से दूरी बनाने के रुख की चर्चा भी इस राजनीतिक बदलाव के बीच हो रही है। 2022 से पहले बनाए गए भागीदारी मोर्चे से जुड़े कुछ दल अब कांग्रेस के साथ संपर्क बढ़ा रहे हैं। पंकज निरंजन का कांग्रेस नेताओं के साथ संपर्क इसी बदलाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। 2017 से पहले यूपी में बीजेपी ने भी ऐसी ही रणनीति बनाई थी। उसने कई छोटी पार्टियों और अपने समुदाय पर पकड़ रखने वाले नेताओं को शामिल किया था।
स्वामी प्रसाद मौर्य की सीटों को लेकर अलग मांगस्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर भी सीटों का मुद्दा सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने करीब एक दर्जन सीटों की मांग रखी है। हालांकि मौर्य का कहना है कि उनकी पार्टी अपने ही चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ेगी।
यहीं कांग्रेस और मौर्य की पार्टी के बीच मतभेद की स्थिति बनती है। कांग्रेस चाहती है कि गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतरें। यानी सीटों की संख्या के साथ-साथ चुनाव चिन्ह भी संभावित समझौते का एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
सीट बंटवारे पर टिकी छोटी पार्टियों की उम्मीदउत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे पर होने वाली बातचीत का असर छोटे दलों की रणनीति पर भी पड़ सकता है। अगर कांग्रेस को अपेक्षाकृत अधिक सीटें मिलती हैं तो उन क्षेत्रीय दलों और नेताओं के लिए कांग्रेस के साथ चुनावी समझौते की संभावना बढ़ सकती है, जो फिलहाल उसके संपर्क में हैं।
वहीं समाजवादी पार्टी की ओर से छोटे दलों को कितनी जगह मिलती है, यह भी इन नेताओं के अगले राजनीतिक कदम को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी और सपा के साथ सीट बंटवारे की बातचीत के बीच उत्तर प्रदेश में गठबंधन की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है।