उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) एक बार फिर बड़े राजनीतिक संकट और संभावित टूट की चर्चाओं के केंद्र में आ गई है। सूत्रों के हवाले से सामने आ रही खबरों के अनुसार, संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले पार्टी में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है। कहा जा रहा है कि पार्टी के कुछ सांसद पाला बदलने की तैयारी में हैं, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि असंतुष्ट सांसदों की संख्या करीब 7 हो सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस में भी राजनीतिक टूट की चर्चाएं जोरों पर हैं।
14 से 16 विधायक भी छोड़ सकते हैं साथ?मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि शिवसेना (यूबीटी) के 14 से 16 विधायक भी पार्टी से अलग होने की तैयारी में हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह संभावित टूट अगले 6 से 7 दिनों के भीतर सामने आ सकती है। यदि यह राजनीतिक घटनाक्रम सच साबित होता है, तो यह उद्धव ठाकरे गुट के लिए दूसरा बड़ा झटका माना जाएगा।
इस बीच शिवसेना नेता और MLC कृपाल तुमाने के बयान ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को एक ‘ऑपरेशन’ का नाम दिया है और दावा किया है कि इस पर लंबे समय से बातचीत और बैठकों का दौर चल रहा था। उनके मुताबिक अब यह चर्चा अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है।
कब हो सकता है बड़ा राजनीतिक ‘ऑपरेशन’?कृपाल तुमाने ने बयान देते हुए कहा, “ऑपरेशन टाइगर के तहत 7 सांसदों के साथ हमारी बातचीत लगभग अंतिम चरण में है। जैसे किसी सर्जरी से पहले जांच और तैयारी की जाती है, वैसे ही यहां भी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट आ चुकी है और अब सिर्फ अंतिम दिन तय होना बाकी है।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह बदलाव संसद के मॉनसून सत्र से पहले ही देखने को मिल सकता है।
हालांकि, उन्होंने संभावित विलय या औपचारिक घोषणा को लेकर स्पष्ट जानकारी देने से परहेज किया। उनका कहना था कि “अभी सभी बातें सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा, लेकिन यह तय है कि ये सभी हमारे साथ आने वाले हैं, और प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।”
पार्टी टूटने की वजह क्या बताई जा रही है?एएनआई से बातचीत के दौरान जब शिवसेना यूबीटी में संभावित टूट की वजह पूछी गई, तो कृपाल तुमाने ने कहा कि यह पूरी तरह से आंतरिक निर्णय और राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। उन्होंने दावा किया कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व और उनकी कार्यशैली से कई लोग प्रभावित हैं, क्योंकि वे जनता के लिए बेहतर काम कर रहे हैं।
उनके अनुसार, “लोग अपने क्षेत्र के विकास और बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं, इसलिए यह बदलाव देखने को मिल सकता है।” हालांकि उन्होंने उद्धव ठाकरे की ओर से किसी वापसी या स्थिति सुधार के दावों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
एक महीने से चल रही थी बातचीतकृपाल तुमाने ने आगे बताया कि इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बातचीत पिछले लगभग एक महीने से जारी थी और अब यह अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उन्होंने एक बार फिर ‘ऑपरेशन’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जैसे ही समय तय होगा, बड़ा राजनीतिक बदलाव सामने आएगा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि शिवसेना (शिंदे गुट) लगातार मजबूत हो रही है और आने वाले समय में इसकी स्थिति और भी अधिक सशक्त होगी।
संजय राउत ने किया दावों का खंडनदूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इन सभी अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कृपाल तुमाने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि “वे कौन हैं?” और कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसे दावों का कोई आधार नहीं है।
राउत ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से भाजपा विपक्षी दलों को तोड़ने की राजनीति करती रही है और इससे पहले भी टीएमसी, एनसीपी और शिवसेना जैसे दलों में विभाजन देखने को मिला है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसी अफवाहों से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा और शिवसेना (यूबीटी) एकजुट बनी रहेगी।