मध्य प्रदेश के भिंड जिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उड़ान भरने की तैयारी में था, तभी हेलीपैड के ऊपर एक ड्रोन मंडराता दिखाई दिया। वीवीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पायलट ने तत्काल टेकऑफ रोक दिया। इस वजह से मुख्यमंत्री समेत हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोगों को करीब 10 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा स्थिति पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही हेलीकॉप्टर ने ग्वालियर के लिए उड़ान भरी।
दंदरौआ हनुमान मंदिर दर्शन के बाद रवाना हो रहे थे मुख्यमंत्रीजानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भिंड जिले के प्रसिद्ध दंदरौआ हनुमान मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे। धार्मिक कार्यक्रम पूरा करने के बाद उन्हें हेलीकॉप्टर से ग्वालियर रवाना होना था। हेलीपैड पर मुख्यमंत्री के साथ प्रभारी मंत्री प्रहलाद पटेल, मंत्री राकेश शुक्ला और भाजपा जिला अध्यक्ष देवेंद्र नरवरिया भी मौजूद थे। सभी लोग हेलीकॉप्टर में सवार हो चुके थे और उड़ान की तैयारी पूरी हो चुकी थी।
ड्रोन दिखते ही सुरक्षा एजेंसियां हुईं सतर्कइसी दौरान हेलीपैड के ऊपर एक ड्रोन उड़ता हुआ दिखाई दिया। संवेदनशील वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान ड्रोन की मौजूदगी को गंभीर सुरक्षा जोखिम मानते हुए पायलट ने हेलीकॉप्टर उड़ाने से इनकार कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, विशेष सुरक्षा दल और अन्य सुरक्षा एजेंसियां तत्काल सक्रिय हो गईं और पूरे इलाके में सघन जांच शुरू कर दी गई।
घेराबंदी के बाद ड्रोन संचालक हिरासत मेंड्रोन की लोकेशन का पता लगाने के लिए पुलिस ने आसपास के क्षेत्र की घेराबंदी की। कुछ ही देर बाद मंदिर परिसर की एक छत पर एक युवक ड्रोन संचालित करता हुआ मिला। पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में लेकर ड्रोन जब्त कर लिया, जिसके बाद उससे पूछताछ शुरू की गई।
वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए उड़ाया था ड्रोनप्रारंभिक पूछताछ में युवक की पहचान राघवेंद्र खेमरिया के रूप में हुई। जांच में सामने आया कि वह दंदरौआ धाम के सोशल मीडिया से जुड़े कार्यों का संचालन करता है और कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग के उद्देश्य से ड्रोन उड़ा रहा था। हालांकि, उसने वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान नो-फ्लाई जोन में बिना प्रशासनिक अनुमति के ड्रोन उड़ाकर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया, जिसे अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही माना है।
सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद भरी उड़ानघटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने लगभग 10 मिनट तक हेलीपैड और आसपास के पूरे क्षेत्र का सुरक्षा सत्यापन किया। जब यह सुनिश्चित हो गया कि कोई खतरा नहीं है, तब मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर ग्वालियर के लिए रवाना किया गया। अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन उड़ाने वाले व्यक्ति ने इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक अनुमति भी नहीं ली थी।
फिलहाल मेहगांव थाना पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि यह केवल लापरवाही का मामला था या फिर वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में कोई गंभीर चूक हुई है। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था और ड्रोन संचालन से जुड़े नियमों को लेकर कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं।