इलेक्ट्रिक वाहनों को भविष्य की सवारी माना जा रहा है, लेकिन जब यही तकनीक भरोसा तोड़ने लगे तो उपभोक्ता का गुस्सा सामने आना तय है। मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। यहां Bajaj Chetak EV से परेशान एक युवक ने अनोखे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया। उसने अपने स्कूटर को “कचरा गाड़ी” का रूप देकर बाजार में घुमाया, ताकि आम लोग उसकी परेशानी को समझ सकें। इस विरोध का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
14 महीने पहले खरीदा था महंगा इलेक्ट्रिक स्कूटरndtv इंडिया की खबर के अनुसार, यह मामला सतना जिले के बिरसिंहपुर इलाके का है, जहां रहने वाले राहुल पांडे ने करीब 14 महीने पहले लगभग 1.10 लाख रुपये खर्च कर Bajaj Chetak EV खरीदा था। उन्हें उम्मीद थी कि यह स्कूटर उनके पेट्रोल खर्च को कम करेगा और बिना झंझट के चलेगा, लेकिन उनका अनुभव बिल्कुल उल्टा साबित हुआ।
शुरुआत से ही आने लगीं तकनीकी दिक्कतेंराहुल के अनुसार, स्कूटर खरीदने के कुछ ही समय बाद उसमें बार-बार खराबी आने लगी। चलते-चलते अचानक स्कूटर बंद हो जाती थी, मानो उसमें कोई “तकनीकी वायरस” आ गया हो। बिना किसी चेतावनी के वाहन रुक जाने से उन्हें कई बार परेशानी झेलनी पड़ी। हालात इतने बिगड़ गए कि स्कूटर को टैंपो में लादकर बार-बार सर्विस सेंटर तक ले जाना पड़ा।
सर्विस के बाद भी समस्या बरकरारराहुल का कहना है कि उन्होंने कई बार स्कूटर की सर्विस कराई, लेकिन हर बार समस्या जस की तस बनी रही। हाल ही में सर्विस कराने के बाद जब वे वापस लौट रहे थे, तभी स्कूटर फिर बीच रास्ते में बंद हो गई। बार-बार की इस समस्या और समाधान न मिलने से उनका धैर्य जवाब दे गया।
अनोखे अंदाज में जताया विरोधलगातार मिल रही दिक्कतों से परेशान होकर राहुल और उनके भाई रोहित पांडे ने विरोध का अलग तरीका अपनाया। उन्होंने स्कूटर को एक मालवाहक वाहन पर रखकर उस पर “कचरा गाड़ी” लिख दिया। इसके बाद वे इसे पूरे बाजार में घुमाने लगे, जिससे लोगों का ध्यान इस ओर खिंच सके।
लोगों से की अपील—कचरा डालें, लेकिन स्कूटर न खरीदेंदोनों भाइयों ने बाजार में लोगों से अपील की कि वे इस “कचरा गाड़ी” में कचरा डालें और इस स्कूटर को खरीदने से बचें। कई लोगों ने उनके इस विरोध का समर्थन करते हुए स्कूटर पर कचरा डाला, जिससे यह प्रदर्शन और भी चर्चा का विषय बन गया।
EV क्वालिटी और सर्विस पर उठे सवालइस अनोखे विरोध ने स्थानीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि यदि उपभोक्ताओं को इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, तो कंपनियों और उनके सर्विस नेटवर्क को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों की गुणवत्ता और सर्विस सिस्टम पर भी सवाल उठने लगे हैं।