झारखंड में JSSC CGL के खिलाफ छात्रों का आंदोलन 19वें दिन भी जारी, CBI जांच और परीक्षा रद्द करने पर अड़े

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन बुधवार को 19वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्र JSSC CGL परीक्षा रद्द करने और मामले की CBI जांच की मांग पर अब भी कायम हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी दोनों प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलन के दौरान कई प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है। कुछ छात्र भूख हड़ताल पर हैं, जबकि तबीयत बिगड़ने के बाद दो प्रदर्शनकारियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी करीब 10 दिनों से जारी भूख हड़ताल के बाद रांची सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हैं।

धरना स्थल पर लाइट बंद होने को लेकर छात्रों ने जताई आशंका

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, मंगलवार देर रात डीसी और एसएसपी धरना स्थल के आसपास गश्त करते दिखाई दिए। इसी दौरान कुछ समय के लिए ग्राउंड और सड़क की स्ट्रीट लाइट बंद हो गई। छात्रों ने इसे लेकर आशंका जताई कि प्रशासन विधानसभा की ओर हुए पिछले प्रदर्शन की तरह लाइट बंद कर आंदोलन खत्म कराने की कोशिश कर सकता है।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों के मुताबिक टेंट के भीतर बिजली और पंखे चालू रहे। लाइट बंद होने को लेकर छात्रों की ओर से जताई गई आशंका पर प्रशासन की ओर से किसी तरह की पुष्टि का उल्लेख नहीं है।
भूख हड़ताल कर रहे छात्रों की तबीयत बिगड़ी

आंदोलन के बीच भूख हड़ताल पर बैठे कुछ छात्रों की तबीयत खराब होने की जानकारी सामने आई है। छात्रों के मुताबिक, राहुल की हालत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद छात्रा अबीबा को भी स्वास्थ्य खराब होने पर अस्पताल ले जाया गया।

फिलहाल रूपेश और सविता भूख हड़ताल पर हैं और उनके अनशन का नौवां दिन बताया गया है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि दोनों केवल पानी का सेवन कर रहे हैं।

वहीं, छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो करीब 10 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति स्थिर है। बताया गया है कि बार-बार अपील के बावजूद उन्होंने खाना लेने से इनकार किया है। अस्पताल में उनके ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की निगरानी की जा रही है।

लाठीचार्ज के विरोध में काली पट्टी और भूख हड़ताल

सोमवार को विधानसभा की ओर मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी छात्रों में नाराजगी है। 'झारखंड छात्र न्याय' के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने लाठीचार्ज के विरोध में एक दिन की भूख हड़ताल और काली पट्टी बांधकर विरोध जताने का ऐलान किया है।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज के साथ पानी की बौछार और आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया। छात्रों ने दावा किया कि इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। दूसरी ओर, रांची पुलिस के मुताबिक झड़प में उसके 14 जवान घायल हुए थे।

बीजेपी और ABVP भी आंदोलन के समर्थन में उतरे

छात्र आंदोलन को लेकर राज्य में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। बीजेपी ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को राज्यव्यापी बंद का आयोजन किया। पार्टी ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए JMM के नेतृत्व वाली सरकार पर प्रदर्शनकारी युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

बीजेपी ने आधी रात के आसपास धरना स्थल पर पहुंचे सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी और उनकी मंशा पर भी सवाल उठाए। वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP ने भी मंगलवार को विधानसभा की ओर अलग मार्च निकाला।

इसके अलावा 'जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच' की ओर से मंगलवार शाम रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मौन जुलूस निकाला गया। संगठन ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है और प्रदर्शन को आगे बढ़ाने के लिए जल्द नई रणनीति घोषित करने की जानकारी दी।

सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से नहीं निकला समाधान

छात्रों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को छठे दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन इससे भी गतिरोध खत्म नहीं हो सका। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर गंभीरता की कमी के आरोप लगाए गए।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि उनकी सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने का आश्वासन भी दिया है। मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक मंच में बदलने का आरोप लगाया है।

फिलहाल छात्रों की मुख्य मांग JSSC CGL परीक्षा रद्द करने और CBI जांच कराने की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन मांगों पर निर्णय होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।