अलविदा जुमा पर श्रीनगर की जामा मस्जिद बंद, मीरवाइज उमर फारूक को किया गया नजरबंद

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में पवित्र रमजान महीने के अंतिम शुक्रवार यानी अलविदा जुमा के मौके पर एक बार फिर श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद को बंद रखे जाने को लेकर विवाद और नाराजगी सामने आई है। अंजुमन औकाफ जामा मस्जिद ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि लगातार सातवें वर्ष भी इस महत्वपूर्ण दिन पर मस्जिद में सामूहिक नमाज की अनुमति नहीं दी गई। परंपरा के अनुसार इस दिन घाटी के अलग-अलग कस्बों और गांवों से हजारों श्रद्धालु जामा मस्जिद पहुंचकर सामूहिक इबादत और दुआ में शामिल होते रहे हैं।

औकाफ के मुताबिक प्रशासन ने एक बार फिर मस्जिद के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए, जिससे किसी भी श्रद्धालु को भीतर जाने की अनुमति नहीं मिली। इसके साथ ही मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ. मौलवी मुहम्मद उमर फारूक को भी उनके घर पर नजरबंद कर दिया गया। बताया गया कि इस कदम के कारण वे अलविदा जुमा के मौके पर पारंपरिक रूप से दिया जाने वाला धार्मिक उपदेश नहीं दे सके और न ही नमाज की अगुवाई कर पाए।

मस्जिद प्रबंधन ने इस स्थिति पर गहरी निराशा जताते हुए कहा कि यह लगातार सातवां अवसर है जब घाटी की केंद्रीय जामा मस्जिद में मुसलमानों को अलविदा जुमा की नमाज अदा करने से रोका गया है। प्रबंधन के अनुसार, इस तरह के प्रतिबंध न केवल लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं, बल्कि उन्हें अपने सबसे महत्वपूर्ण इबादतगाह में नमाज अदा करने के अधिकार से भी वंचित करते हैं।
औकाफ ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से जामा मस्जिद को अलग-अलग मौकों पर मनमाने तरीके से बंद किया जाता रहा है। संगठन का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयाँ घाटी में धार्मिक गतिविधियों पर लगाई जा रही पाबंदियों और असुरक्षा की स्थिति को दर्शाती हैं। उन्होंने इस नीति को अनुचित बताते हुए प्रशासन से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ. मौलवी मुहम्मद उमर फारूक ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि रमजान के अंतिम शुक्रवार को जब दूर-दराज के इलाकों से लोग जामा मस्जिद श्रीनगर में एकत्र होकर नमाज और दुआ के लिए आते हैं, तब मस्जिद के दरवाजों का बंद कर दिया जाना बेहद दुखद है। उनके अनुसार लगातार सातवें वर्ष भी लोगों को इस पवित्र अवसर पर सामूहिक इबादत से वंचित रखा गया है।

मीरवाइज ने आगे कहा कि रमजान के दौरान जिस तरह इजराइल द्वारा मस्जिद अल-अक्सा के दरवाजे बंद किए जाने की घटनाएँ सामने आई हैं, उसी तरह का एक दर्दनाक दृश्य यहां भी देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद पीड़ादायक है और इससे लोगों की भावनाएं आहत होती हैं। उनके शब्दों में, “यह बेहद अफसोस की बात है कि श्रद्धालुओं के लिए अल्लाह के घर के दरवाजे ही बंद कर दिए जा रहे हैं।”