वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल की एक टिप्पणी ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले की घटना का जिक्र करते हुए सिब्बल ने कहा कि उन्हें ऐसे देश में रहने पर शर्म महसूस होती है, जहां विपक्षी नेताओं की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने वाली घटनाएं सामने आती हैं। उनके इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और सिब्बल पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया है।
अभिषेक बनर्जी पर हमले को लेकर उठाए सवालरविवार को एक कार्यक्रम के दौरान कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे एक वीडियो का हवाला देते हुए दावा किया कि अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला सामान्य घटना नहीं बल्कि सुनियोजित प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य की बात रही कि अभिषेक ने हेलमेट पहन रखा था, अन्यथा परिणाम गंभीर हो सकते थे। सिब्बल के अनुसार, इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत हैं और इन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस मुद्दे को केवल अभिषेक बनर्जी तक सीमित नहीं रखा बल्कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी पर हुए कथित हमले का भी उल्लेख किया। सिब्बल ने कहा कि चुनाव बाद हिंसा की शिकायत दर्ज कराने जा रहे कल्याण बनर्जी के सिर के पीछे पत्थर मारा गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि चोट और गंभीर होती या उनका सिर सड़क से टकरा जाता तो स्थिति कितनी भयावह हो सकती थी। उनके मुताबिक किसी व्यक्ति के सिर को निशाना बनाना साधारण हिंसा नहीं माना जा सकता।
लोकतंत्र और विपक्ष की भूमिका पर जताई चिंताअपने वक्तव्य में सिब्बल ने कहा कि यदि चुनावी जीत के बाद राजनीतिक विरोधियों को डराने या दबाने की कोशिश की जाती है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या विकसित भारत की परिकल्पना ऐसे ही माहौल में की जा रही है, जहां विपक्ष को खुलकर अपनी बात रखने में डर महसूस हो।
सिब्बल ने इस मुद्दे पर प्रमुख संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर बैठे नेताओं की प्रतिक्रिया को लेकर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी का नाम लेते हुए पूछा कि ऐसी घटनाओं पर उनकी क्या राय है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम आने के बाद तृणमूल कांग्रेस के कार्यालयों और समर्थकों को भी निशाना बनाया गया। उनका कहना था कि यदि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा हिंसा में बदलती रही तो भविष्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की इच्छा भी कमजोर पड़ सकती है।
भाजपा ने दिया करारा जवाबकपिल सिब्बल की टिप्पणी के बाद भाजपा ने उनके बयान को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखा हमला बोला। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत में लंबे समय तक वकालत करने वाले व्यक्ति से इस तरह की टिप्पणी की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि सिब्बल देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर एकतरफा और नकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं।
पूनावाला ने कहा कि जब पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं, तब कपिल सिब्बल ने कोई सार्वजनिक चिंता नहीं जताई थी। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ता खागेन मुर्मू की हत्या, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हुए हमले और विभिन्न पंचायत चुनावों के दौरान हुई हिंसा का जिक्र करते हुए पूछा कि उन मामलों पर सिब्बल की प्रतिक्रिया कहां थी। भाजपा प्रवक्ता ने यह भी याद दिलाया कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणी की थी।
'टीएमसी की अंदरूनी लड़ाई का नतीजा'भाजपा ने इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देते हुए दावा किया कि अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला पार्टी के भीतर चल रहे विवादों से भी जुड़ा हो सकता है। शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी दल और उनके समर्थक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते-करते देश की संस्थाओं पर ही सवाल उठाने लगते हैं।
उन्होंने राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस और कपिल सिब्बल का नाम लेते हुए कहा कि ये नेता अक्सर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय संस्थानों को लेकर नकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं। पूनावाला के अनुसार, भाजपा की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन देश और उसकी संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं माना जा सकता।
कपिल सिब्बल के बयान और भाजपा की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्मा सकता है।