जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले से सरकारी स्कूल की गंभीर लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां गर्मी की 10 दिन की छुट्टियां शुरू होने से पहले स्कूल स्टाफ ने परिसर बंद कर दिया, लेकिन उन्हें यह तक ध्यान नहीं रहा कि सातवीं कक्षा का 13 वर्षीय छात्र क्लासरूम के भीतर गहरी नींद में सो रहा है। करीब चार घंटे तक बच्चा स्कूल के अंदर बंद रहा। बाद में उसकी आवाज सुनकर स्थानीय लोगों ने ताला तोड़कर उसे सुरक्षित बाहर निकाला। घटना का वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए पूरे स्कूल स्टाफ को निलंबित कर दिया।
क्लासरूम में सो गया था छात्र, किसी ने नहीं की जांचइंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना रामबन जिले के क्रवाह स्थित गवर्नमेंट मिडिल स्कूल की है। शनिवार को स्कूल में गर्मी की छुट्टियों से पहले अंतिम कार्यदिवस था। मिड-डे मील के बाद बच्चों को स्पोर्ट्स किट वितरित की गई और अधिकांश छात्र मैदान में खेलने चले गए। वहीं सातवीं कक्षा का एक छात्र अत्यधिक थकान के कारण क्लासरूम में रखी बेंच पर सो गया।
बताया गया कि शुरुआत में मौजूद दो शिक्षकों ने उसे बाहर जाकर खेलने के लिए कहा था। इसके बाद शिक्षक अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कार्यालय चले गए। इसी बीच छात्र दोबारा कक्षा में लौट आया और डेस्क पर सिर रखकर गहरी नींद में सो गया। छुट्टी होने के बाद सभी बच्चे घर चले गए और स्कूल स्टाफ ने कक्षाओं की जांच किए बिना ही मुख्य गेट और कमरों में ताला लगाकर स्कूल बंद कर दिया।
शाम को नींद खुली तो खुद को स्कूल में बंद पायाकरीब चार घंटे बाद शाम लगभग सात बजे जब छात्र की आंख खुली तो उसने खुद को सुनसान स्कूल में बंद पाया। अचानक यह स्थिति देखकर वह घबरा गया और जोर-जोर से मदद के लिए आवाज लगाने लगा। उसकी चीखें सुनकर वहां से गुजर रहे एक स्थानीय व्यक्ति ने अन्य लोगों को बुलाया। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर स्कूल का ताला तोड़ा और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला। बाद में रात करीब साढ़े आठ बजे उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
ऐसा था छात्र का थका देने वाला दैनिक रूटीनबताया जा रहा है कि पांच भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर आने वाला यह छात्र पिछले दो वर्षों से स्थानीय मदरसे के हॉस्टल में रह रहा था। उसका दिन बेहद व्यस्त रहता था। सुबह 9:30 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक वह सरकारी स्कूल में पढ़ाई करता था। इसके बाद वह मदरसे पहुंचकर देर रात तक धार्मिक शिक्षा लेता था और फिर सुबह करीब तीन बजे नमाज के लिए उठना पड़ता था।
मदरसे में रहने वाले अन्य बच्चों को दिन में आराम करने का समय मिल जाता था क्योंकि वे सरकारी स्कूल नहीं जाते थे, लेकिन इस छात्र को लगातार दोनों जगह पढ़ाई करनी पड़ती थी। उसके अन्य चार भाई-बहन भी इसी सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं, हालांकि वे मदरसे में नहीं रहते।
टीवी की आदत छुड़ाने के लिए कराया था मदरसे में दाखिलाछात्र के पिता, जो स्थानीय स्तर पर कारोबार करते हैं, ने बताया कि उनका बेटा काफी शरारती था और स्कूल से लौटने के बाद लंबे समय तक टीवी देखता रहता था। उसकी इस आदत का असर घर के अन्य बच्चों पर भी पड़ने लगा था। इसी कारण अनुशासन और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कराने के उद्देश्य से उन्होंने उसे मदरसे के हॉस्टल में भेजा था।
उन्होंने यह भी नाराजगी जताई कि जब उनका बेटा तय समय पर शाम को मदरसे नहीं पहुंचा, तब वहां के प्रबंधन ने भी उन्हें इसकी कोई सूचना नहीं दी। घटना के बाद परिवार ने फैसला लिया है कि अब बच्चा मदरसे में नहीं रहेगा और केवल सरकारी स्कूल में ही अपनी पढ़ाई जारी रखेगा।
हेडमास्टर बोले- पहले ही दी थी परिजनों को चेतावनीइस पूरे मामले में मुख्य शिक्षा अधिकारी ने स्कूल के हेडमास्टर अब्दुल वाहिद सहित पूरे स्टाफ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि हेडमास्टर का कहना है कि उन्होंने पहले ही छात्र की लगातार अधूरी नींद और थकान को लेकर उसके माता-पिता के साथ-साथ बनिहाल के जोनल शिक्षा अधिकारी को भी जानकारी दी थी।
हेडमास्टर के अनुसार, शनिवार को छुट्टी से पहले उन्होंने छात्र की मां को स्कूल बुलाकर स्पष्ट कहा था कि बच्चे को या तो सरकारी स्कूल में पढ़ाया जाए या फिर मदरसे में रखा जाए, क्योंकि लगातार नींद पूरी न होने से उसकी सेहत और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि उस समय छात्र की मां ने भी बेटे को मदरसे से निकालने का आश्वासन दिया था। अब इस घटना के बाद शिक्षा विभाग मामले की विस्तृत जांच कर रहा है।