डोडा। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में मंगलवार तड़के भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन ने ठठरी इलाके के ऊपरी क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया। अचानक हुए इस हादसे में बड़ी मात्रा में मलबा, पत्थर और कीचड़ रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया, जिसकी चपेट में कई घर, दुकानें और वाहन आ गए। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है, लेकिन स्थानीय लोगों की संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचा है।
सुबह जब लोग अपने घरों से बाहर निकले तो इलाके का मंजर पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। कई जगहों पर मलबे का ढेर जमा था और कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं। भूस्खलन के कारण सड़कें भी प्रभावित हुईं और सामान्य आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।
मलबे में दबे कई वाहन, पत्थरों और मिट्टी से ढकी सड़केंस्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, भूस्खलन के बाद सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर और भारी मात्रा में मिट्टी जमा हो गई। स्थिति यह थी कि लोगों को नुकसान का जायजा लेने के लिए मलबे के ऊपर से होकर गुजरना पड़ा। कई वाहन पलट गए, जबकि कई कारें पूरी तरह पत्थरों और मिट्टी के नीचे दब गईं। कुछ वाहन तो केवल मलबे का हिस्सा दिखाई दे रहे थे।
ठठरी क्षेत्र के तहसीलदार सतीश राणा ने बताया कि सोमवार देर रात करीब 12 बजे से इलाके में तेज बारिश शुरू हुई थी। उन्होंने संभावना जताई कि अत्यधिक बारिश के कारण बादल फटने जैसी स्थिति बनी हो सकती है, जिसके चलते भारी मात्रा में पानी के साथ मलबा और कीचड़ बहकर आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच गया।
तहसीलदार ने बताया कि शुरुआती जांच में करीब 10 घरों और 25 दुकानों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। कई मकानों में पानी और कीचड़ घुस गया है। प्रशासन की टीम नुकसान का विस्तृत आकलन करने में जुटी हुई है।
जान बची, लेकिन संपत्ति का भारी नुकसानस्थानीय लोगों ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा में किसी की जान नहीं गई, यह सबसे बड़ी राहत की बात है, लेकिन कई परिवारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि भगवान का शुक्र है कि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन लोगों के घर, दुकानें और वाहन बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि जल्द सर्वे कराकर प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जाए।
एक अन्य स्थानीय निवासी शमाउद्दीन ने बताया कि रात करीब साढ़े 12 बजे तेज बारिश की आवाज से उनकी नींद खुल गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय लगातार पानी का तेज बहाव दिखाई दे रहा था। सुबह करीब 3 बजे अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बन गई और पानी व मलबा तेजी से इलाके में फैल गया।
उन्होंने बताया कि हालात इतने भयावह थे कि कुछ समय के लिए लोगों को अपनी जान बचाना भी मुश्किल लग रहा था। अचानक आए मलबे और पानी ने कई लोगों के घरों और वाहनों को नुकसान पहुंचाया।
कई परिवारों के सामने राहत का संकटशमाउद्दीन ने बताया कि इलाके में कई लोगों का घर और सामान पूरी तरह बर्बाद हो गया है। कई वाहन या तो बह गए हैं या फिर मलबे में दबे हुए हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक प्रशासन की ओर से एसडीएम ने मौके का दौरा किया है।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार से अपील की कि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द राहत सामग्री, आर्थिक सहायता और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि कई परिवारों के पास रहने और जरूरत का सामान तक नहीं बचा है। कुछ लोगों के पास रात गुजारने के लिए कंबल तक उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए तत्काल मदद की आवश्यकता है।
प्रशासन और मौसम विभाग की नजर हालात परमौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, डोडा जिले में 6 जुलाई को सामान्य से काफी अधिक बारिश दर्ज की गई थी। सोमवार को जिले में 26.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 4.1 मिलीमीटर रहता है।
आईएमडी के मुताबिक, डोडा के अलावा किश्तवाड़, उधमपुर, रियासी, जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में भी सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन सतर्क है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं।
अधिकारियों की टीमें मौके पर मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी कर रही हैं। साथ ही प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है ताकि जरूरतमंद परिवारों तक जल्द सहायता पहुंचाई जा सके।