जम्मू-कश्मीर में विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हालिया बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को उन्हें कानूनी नोटिस भेजा है। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री अपने आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करें या फिर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें। यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर ऐसा नहीं किया गया तो उनके खिलाफ 100 करोड़ रुपये के मानहानि दावे के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
बीजेपी ने दिया सात दिन का समयश्रीनगर में जारी बीजेपी के आधिकारिक बयान के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर इकाई की ओर से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को डाक और ई-मेल के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा गया है। पार्टी के प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री को सात दिनों के भीतर अपने आरोपों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त सबूत उपलब्ध कराने होंगे। यदि वे ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से अपने बयान के लिए माफी मांगनी होगी। ऐसा न होने की स्थिति में बीजेपी 100 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे की कार्रवाई शुरू करेगी।
आखिर किस बयान से शुरू हुआ पूरा विवाद?यह सियासी टकराव पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा दिए गए एक बयान के बाद सामने आया। हजरतबल में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी सरकार को अस्थिर करने के लिए बीजेपी लगातार कोशिशें कर रही है। उनका कहना था कि उनकी पार्टी के विधायकों को तोड़ने के उद्देश्य से भारी धनराशि और मंत्री पद का लालच दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि विपक्ष उनकी पार्टी के विधायकों को अपने पाले में लाने के लिए 20 से 30 करोड़ रुपये तक की पेशकश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू क्षेत्र से उनकी पार्टी के एक विधायक ने स्वयं उन्हें इस कथित प्रस्ताव की जानकारी दी थी। हालांकि बीजेपी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह केवल पार्टी की छवि खराब करने का प्रयास है।
'नेशनल कॉन्फ्रेंस को कमजोर करने की हो रही कोशिश'अपने संबोधन में उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को तोड़ने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं। उनके अनुसार, जब पैसे और मंत्री पद का लालच असर नहीं कर पाया तो अब बंद कमरों में उनके विधायकों से यह कहा जा रहा है कि यदि वे बीजेपी का साथ दें तो उन्हें जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा वापस दिलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि जम्मू से उनकी पार्टी के एक विधायक ने उन्हें बताया कि बीजेपी से जुड़े एक पदाधिकारी और सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने उनसे संपर्क कर समर्थन मांगा। इसके बदले 20 से 30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और राज्य का दर्जा दिलाने का आश्वासन दिया गया। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस तरह की पेशकश यह दर्शाती है कि विपक्ष को जनता के जनादेश पर भरोसा नहीं है।
विधायकों की ईमानदारी पर जताया भरोसाउमर अब्दुल्ला ने अपनी पार्टी के विधायकों पर पूरा विश्वास जताते हुए कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का कोई भी विधायक धन या पद के लालच में अपनी निष्ठा नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का एक भी जनप्रतिनिधि 20 करोड़ ही नहीं, बल्कि 100 करोड़ रुपये के बदले भी अपनी ईमानदारी नहीं बेचेगा, क्योंकि सभी जानते हैं कि उन्हें अपने कर्मों का जवाब ऊपर वाले के सामने देना है।
मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि उनकी पार्टी इतनी कमजोर है कि पीछे के रास्ते से सत्ता हासिल की जा सकती है। उनके अनुसार, जनता के जनादेश का सम्मान होना चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।