शिमला: चलौंठी में हालात बिगड़े, भवनों के बाद सड़क में भी पड़ी दरारें; भारी वाहनों पर रोक, लोगों में दहशत

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भू-धंसाव जैसे हालात गंभीर होते जा रहे हैं। संजौली से सटे चलौंठी क्षेत्र में पहले भवनों में दरारें सामने आईं और अब सड़कें भी चटकने लगी हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ढली–संजौली बाईपास पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। एहतियातन शिमला पुलिस ने ऊपरी शिमला, मशोबारा और करसोग की ओर जाने वाले भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट कर दिया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

ट्रैफिक डायवर्जन के तहत ऊपरी शिमला से शहर की ओर आने वाली बसों को भट्टाकुफर मार्ग से शिमला में प्रवेश कराया जा रहा है, जबकि शिमला से ऊपरी शिमला की ओर जाने वाली बसों को ढली टनल के रास्ते भेजा गया है। अचानक बदली गई इस व्यवस्था के कारण शहर की यातायात प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है। कई इलाकों में सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात की रफ्तार बेहद धीमी हो गई।

संजौली क्षेत्र में हालात सबसे ज्यादा खराब देखने को मिले। यहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रही, जबकि सुबह और शाम के व्यस्त समय में हालात और बिगड़ गए। जाम की वजह से आम लोगों के साथ-साथ मरीजों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ी। कई लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचने में सामान्य समय से दोगुना वक्त लग गया, जिससे दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया।

फोरलेन निर्माण को ठहरा रहे जिम्मेदार

स्थानीय निवासियों का कहना है कि चलौंठी में चल रहे फोरलेन निर्माण कार्य ने हालात को और बिगाड़ दिया है। उनका आरोप है कि लगातार खुदाई और भारी निर्माण गतिविधियों के कारण जमीन कमजोर हो गई, जिससे सड़कें दरकने लगीं। लोगों का मानना है कि अगर समय रहते वैज्ञानिक और तकनीकी उपाय अपनाए जाते, तो आज बाईपास को बंद करने की नौबत नहीं आती।

रिहायशी इलाकों पर भी मंडरा रहा खतरा

सड़कों में आई दरारों के चलते आसपास के रिहायशी मकानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। कई घरों में पहले से ही दरारें दिखाई देने लगी हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल है। बाईपास के बंद होने से शिमला शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और वैकल्पिक मार्गों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

छोटे वाहनों के लिए वन-वे व्यवस्था पर विचार

शिमला पुलिस ने संजौली–ढली बाईपास पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी है। वहीं, मंत्री के निर्देशों के बाद छोटे वाहनों के लिए इस मार्ग को वन-वे करने पर विचार किया जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की संभावना है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू किया जाए और सुरक्षित यातायात जल्द बहाल किया जाए। साथ ही वैकल्पिक मार्गों पर ट्रैफिक नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि लोगों को जाम से राहत मिल सके। फिलहाल भारी वाहनों की आवाजाही बंद होने से लोगों को खासा संघर्ष करना पड़ रहा है। आईजीएमसी, छोटा शिमला और पुराने बस स्टैंड की ओर जाने वाले कई लोगों को ढली से संजौली तक पैदल सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।