यूजीसी नियमों के खिलाफ दिल्ली में आंदोलन की तैयारी, रामलीला मैदान में होगा बड़ा शक्ति प्रदर्शन

यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में उभरते विरोध के बीच अब आंदोलन ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। सवर्ण समाज समन्वय समिति से जुड़े 40 से अधिक सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। राजधानी दिल्ली स्थित पंडित मदन मोहन मालवीय मिशन स्मृति भवन में हुई अहम बैठक के बाद आंदोलन को और व्यापक रूप देने की रणनीति तय की गई।

समिति ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने यूजीसी नियमों को वापस नहीं लिया, तो 8 मार्च 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल जनआंदोलन किया जाएगा। इस प्रस्तावित प्रदर्शन को “यूजीसी रोल बैक आंदोलन” का नाम दिया गया है, जिसमें देशभर से संगठनों और समर्थकों के जुटने की संभावना जताई जा रही है।

आंदोलन की शुरुआत 1 फरवरी को प्रस्तावित देशव्यापी बंद के समर्थन से की जाएगी। समिति का कहना है कि यह बंद सरकार तक जनभावनाओं को पहुंचाने का पहला चरण होगा, जिसके बाद दिल्ली में निर्णायक शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा।

इस संबंध में जानकारी देते हुए समिति के प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यूजीसी के मौजूदा नियम न केवल खामियों से भरे हैं, बल्कि समाज में विभाजन पैदा करने वाले भी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कानून को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसके खिलाफ संघर्ष अंतिम फैसले तक जारी रहेगा।

स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अस्थायी रोक को समाधान नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, जब तक संसद इस नियम को पूरी तरह वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने सरकार से संवाद की बजाय नियम थोपने की नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की।

प्रेस वार्ता में कई प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें करणी सेना के राज सिंह शेखावत, भीम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीधर साल्वे, हिंदू महासभा के विजय कौशिक, कायस्थ महासभा के अनूप श्रीवास्तव और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डीपी श्रीवास्तव शामिल थे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में यूजीसी नियमों का विरोध करते हुए आंदोलन को मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।