सफदरजंग अस्पताल पहुंचीं सोनम वांगचुक की पत्नी, बोली - डॉक्टरों की मंजूरी के बिना....

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा धरनास्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद घटनाक्रम लगातार चर्चा में बना हुआ है। इसी बीच उनकी पत्नी गीतांजलि भी अस्पताल पहुंच गई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर सोनम वांगचुक के इलाज को लेकर महत्वपूर्ण अपील की है।

गीतांजलि ने डॉक्टरों और प्रशासन से की यह मांग

गीतांजलि ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि वह इस समय दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौजूद हैं, जहां सोनम वांगचुक भर्ती हैं। उन्होंने आग्रह किया कि उनकी अनुमति, परिवार की सहमति और पिछले 20 दिनों से वांगचुक की स्वास्थ्य निगरानी कर रहे डॉक्टरों की मंजूरी के बिना उन्हें न तो मुंह के जरिए और न ही नसों के माध्यम से किसी प्रकार की दवा या अन्य चिकित्सकीय सामग्री दी जाए। उनके इस बयान के बाद अस्पताल में चल रहे इलाज को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

सोनम वांगचुक को हटाए जाने पर विपक्ष का सरकार पर हमला


सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार को घेर रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े किए।

प्रियंका भारती ने जताई कड़ी आपत्ति

आरजेडी प्रवक्ता प्रियंका भारती ने अपने पोस्ट में लिखा, सोनम जी को जबरन जंतर-मंतर से उठाया गया। उन्हें कपड़ों से ढककर ले जाया गया, लेकिन सरकार शायद यह भूल गई कि लोकतंत्र के चीरहरण को कपड़ों से नहीं छिपाया जा सकता। जिन छात्रों ने अपनी जान गंवाई है, उनके खून के धब्बे आपकी जिम्मेदारी हैं। एक समय ऐसा भी आएगा जब लोग यह बताने में संकोच करेंगे कि वे भाजपा से जुड़े थे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया दोनों जगह इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई।
संजय सिंह ने भी उठाए सरकार पर सवाल

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर लिखा, ये कैसी गुंडागर्दी है? मोदी जी, सत्ता का अहंकार ज्यादा दिन नहीं चलता। जिन युवाओं पर आज लाठियां चलाई जा रही हैं, वही कल सत्ता बदलने की ताकत बनेंगे। सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं, लेकिन उनकी मांगें सुनने के बजाय उन्हें जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती कर दिया गया। उनके बयान के बाद विपक्षी दलों की ओर से सरकार के खिलाफ आलोचना और तेज हो गई।

डिंपल यादव ने कहा- लोकतंत्र पर सीधा प्रहार

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए एक्स पर लिखा कि सोनम वांगचुक को जबरन हटाना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की भावना को कुचलने जैसा है। भाजपा सरकार अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं, बल्कि तानाशाही का संकेत है। उनके इस बयान के बाद विपक्ष की ओर से लगातार सरकार को घेरा जा रहा है।

21वें दिन पुलिस ने अस्पताल में कराया भर्ती

गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर कई दिनों से भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को शनिवार को उनके अनशन के 21वें दिन दिल्ली पुलिस ने धरनास्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। साथ ही पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद अन्य लोगों से भी शांतिपूर्वक स्थान खाली करने की अपील की। पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की गई ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

हाई कोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह का हवाला

दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के अनुरूप की गई है। पुलिस के अनुसार, लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सोनम वांगचुक को तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में अस्पताल ले जाना आवश्यक हो गया था। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए और जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से धरनास्थल खाली करने का अनुरोध किया गया।

लगातार गिरती सेहत ने बढ़ाई चिंता


सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर पिछले कई दिनों से जारी मेडिकल बुलेटिन में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी। दो दिन पहले जारी रिपोर्ट में बताया गया था कि लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने के कारण उनका वजन 8 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है और उनकी शारीरिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। डॉक्टरों ने आशंका जताई थी कि यदि समय रहते उचित चिकित्सा सहायता नहीं मिली तो उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसी को देखते हुए उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में अस्पताल में भर्ती कराया गया।