अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी हुई तो 42 दिन का अनशन करूंगा; प्रदर्शन से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा बयान

राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इस आंदोलन के समर्थन में अब कई चर्चित चेहरे भी सामने आने लगे हैं। इसी कड़ी में जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन का समर्थन करने की घोषणा की है। कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को गिरफ्तार किया जाता है तो वह इसके विरोध में 42 दिनों तक अनशन करेंगे।

सोनम वांगचुक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में आयोजित होने वाले इस प्रदर्शन को लेकर पहले से ही काफी हलचल बनी हुई है। वांगचुक इससे पहले भी लद्दाख से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर लंबे समय तक भूख हड़ताल और आंदोलन कर चुके हैं। ऐसे में उनके इस नए ऐलान ने प्रदर्शन को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

दिल्ली आने से पहले जारी किया वीडियो

अभिजीत दीपके के भारत पहुंचने से पहले सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने बताया कि वह लद्दाख से दिल्ली आ रहे हैं और जंतर-मंतर पर लोगों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उनका CJP और उसके नेताओं से संपर्क बढ़ा है, जिसकी उन्होंने एक दिलचस्प वजह भी बताई।

वांगचुक ने कहा, 6 जून को मैं लद्दाख से दिल्ली आ रहा हूं और जंतर-मंतर पर आप सभी से मुलाकात करूंगा। मैं खुद भी इस बात को लेकर हैरान हूं कि इतने कम समय में कॉकरोच जनता पार्टी से मेरा जुड़ाव इतना मजबूत हो गया। इसकी वजह मैं खुद को नहीं, बल्कि लद्दाख के एलजी वीके सक्सेना को मानता हूं।

उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि CJP युवाओं की रचनात्मक सोच और अभिव्यक्ति का एक मंच है और सरकार को उनके संदेश को समझने की कोशिश करनी चाहिए। उनके मुताबिक, इसके बाद कुछ ऐसी घटनाएं हुईं जिनकी वजह से उनका संपर्क पार्टी और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके से बढ़ता चला गया।
CJP नेताओं की जमकर की तारीफ

सोनम वांगचुक ने CJP के नेताओं को ईमानदार, सरल और देशहित के लिए काम करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के लोगों से बातचीत के बाद उन्हें महसूस हुआ कि ये युवा अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, जब मैं इन लोगों से मिला तो मुझे लगा कि ये बेहद सीधे-सादे, साफ नीयत वाले और देश के प्रति समर्पित युवा हैं। मुझे भारत के लोकतांत्रिक ढांचे पर पूरा विश्वास है और उम्मीद है कि राजधानी दिल्ली में हर नागरिक को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता मिलेगी।

42 दिन के अनशन की चेतावनी

वांगचुक ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होगा, लेकिन यदि अभिजीत दीपके को किसी भी कारण से गिरफ्तार किया जाता है तो वह विरोध स्वरूप लंबे अनशन पर बैठेंगे।

उन्होंने कहा, अगर किसी वजह से अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया जाता है या गिरफ्तार किया जाता है, तो मैं मजबूर होकर अनशन शुरू करूंगा। इस बार यह अनशन छह सप्ताह तक चलेगा, यानी पूरे 42 दिन। मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार हूं। अब यह समाज और युवाओं को तय करना है कि वे इस मुद्दे पर क्या भूमिका निभाना चाहते हैं।

प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील

अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों को विशेष सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि आंदोलन की ताकत उसकी शांति और अनुशासन में होती है, इसलिए किसी भी हाल में हिंसा या टकराव की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि वे अपने साथ सिर्फ जरूरी सामान लेकर आएं। उनके मुताबिक प्रदर्शन स्थल पर पानी की बोतल, मोबाइल फोन और कुछ फूल पर्याप्त हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति को लाठी, डंडा, पत्थर या ऐसा कोई सामान लेकर नहीं आना चाहिए जिससे विवाद की स्थिति बन सके।

शरारती तत्वों पर नजर रखने को कहा

वांगचुक ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति आंदोलन को बदनाम करने या माहौल खराब करने की कोशिश करता दिखाई दे तो उस पर नजर रखी जाए। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे व्यक्तियों की तस्वीर या वीडियो रिकॉर्ड करें और तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दें।

उन्होंने कहा, अगर कोई व्यक्ति हथियारनुमा वस्तु, पत्थर या अन्य आपत्तिजनक सामग्री लेकर आता दिखाई दे तो उसकी फोटो खींचिए और नजदीकी पुलिसकर्मी को सूचना दीजिए। ऐसे तत्व किसी भी जनआंदोलन की छवि खराब कर सकते हैं और युवाओं की आवाज को कमजोर करने का काम करते हैं।

अपने संदेश के अंत में सोनम वांगचुक ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहना चाहिए ताकि लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोग एक सकारात्मक उदाहरण पेश कर सकें। उन्होंने लोगों से संयम बनाए रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप अपनी बात रखने की अपील करते हुए कहा कि यदि आंदोलन अनुशासित रहेगा तो यह देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा का माध्यम बन सकता है।