मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ शनिवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। अब इन लोगों के खिलाफ पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोप में एफआईआर दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों पर यह कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि कितने लोगों के खिलाफ वास्तव में एफआईआर दर्ज की गई है। दिल्ली में यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उस आंदोलन के समर्थन में आयोजित किया गया था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई। पार्टी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण और मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध जताने का आह्वान किया था। लेकिन भारी सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और हिरासत की कार्रवाइयों के चलते प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच सके।
पिछले प्रदर्शन से सबक लेकर पहुंचे लोगजुलाई में हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले चुके कई लोग इस बार भी आंदोलन का समर्थन करने दिल्ली पहुंचे थे। वे अपने साथ पोस्टर, डिजिटल राजनीतिक कलाकृतियां और संभावित पुलिस कार्रवाई को ध्यान में रखकर जरूरी सामान लेकर आए थे। कुछ लोगों ने घर पर ही पोस्टर तैयार किए थे, जबकि अन्य ने कथित अवैध हिरासत और पुलिसकर्मियों की वर्दी पर नामपट्टियां नहीं होने जैसे मुद्दों को अपनी कलाकृतियों के जरिए उठाया। पिछले प्रदर्शन में शामिल रहे लोगों ने नए प्रदर्शनकारियों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी थी। उनके सुझावों में कम से कम दो मास्क, तैराकी के चश्मे, रेनकोट और ऐसे कपड़े रखने की बात शामिल थी, जिनके भीगने पर परेशानी न हो। इन तैयारियों के पीछे संभावित लाठीचार्ज या अन्य पुलिस कार्रवाई की आशंका बताई गई। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि जुलाई के आंदोलन में हिस्सा लेने के अनुभव के कारण इस बार वे चाहते थे कि नए लोग बेहतर तैयारी के साथ आएं। उन्होंने बताया कि कई लोग घरों पर ही प्रदर्शनकारियों के लिए राजनीतिक पोस्टर और कलाकृतियां बना रहे थे।
हार्दिक ने डिजिटल पोस्टर के जरिए उठाए सवाल
पहले के प्रदर्शनों में शामिल रहे हार्दिक ने भी शनिवार के आंदोलन से पहले डिजिटल कलाकृतियां तैयार की थीं। उन्होंने कथित अवैध हिरासत और पुलिसकर्मियों के नामपट्टियां नहीं पहनने जैसे मुद्दों को पोस्टरों में जगह दी। हार्दिक ने कहा कि वे संभावित लाठीचार्ज जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर भी तैयारी कर रहे थे। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि उनके पूर्वजों ने शोषणकारी शासन के खिलाफ संघर्ष किया था और आज वे अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए विरोध दर्ज करा रहे हैं। हार्दिक ने यह भी कहा कि उनकी ज्यादातर दोस्त महिलाएं हैं और मौजूदा हालात में उनके असुरक्षित महसूस करने के कारण वे उनके लिए भी आवाज उठाना चाहते हैं। हार्दिक के मुताबिक, उन्होंने पोस्टरों में लोगों को मास्क, तैराकी के चश्मे, रेनकोट और सुविधाजनक कपड़े साथ रखने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि इन सुझावों के पीछे पुलिस कार्रवाई की आशंका को ध्यान में रखना एक वजह थी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाला आंदोलन भी याद कियाहार्दिक ने जुलाई में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया था। 20 जुलाई को CJP की ओर से नीट में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर संसद तक मार्च निकाला गया था। उस आंदोलन में राजनीतिक नेताओं, अभिनेताओं और आम लोगों ने भाग लिया था। उस दौरान भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी और आंदोलन एक महीने से अधिक समय तक चला था। संदर्भ सामग्री के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारी आंदोलन से अलग हो गए थे। इस बार CJP ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण और फॉर्म-6 से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को मुद्दा बनाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। हालांकि, शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन बड़े स्तर पर आयोजित नहीं हो सका। दिल्ली पुलिस ने कम समय पहले सूचना दिए जाने और पिछले प्रदर्शन के दौरान नियमों के पालन को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए आयोजन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
दिल्ली में 25 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनातीप्रदर्शन को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। जानकारी के अनुसार, करीब 25,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया। बैरिकेडिंग के कारण प्रदर्शनकारियों को आयोजन स्थल तक पहुंचने में मुश्किल हुई और अलग-अलग स्थानों पर लोगों को हिरासत में लिया गया। दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास को लेकर भी प्रतिबंध लगाए गए थे। इस व्यवस्था का असर प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश कर रहे लोगों पर पड़ा। कई पत्रकारों को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ पत्रकारों ने आरोप लगाया कि प्रेस पहचान पत्र दिखाने के बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया। इस बार प्रदर्शनकारियों के बीच आपसी संपर्क भी चुनौतीपूर्ण रहा। जुलाई के आंदोलन में शामिल रहे लोगों के मुताबिक, उन्हें एक-दूसरे तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से सोशल मीडिया पोस्ट और संदेशों पर निर्भर रहना पड़ा। इससे यह तय करना मुश्किल हो गया कि किस जगह और किस समय पहुंचना है।
‘एक जगह नहीं जुटे तो भी आवाज उठाएंगे’एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि पिछले आंदोलन के दौरान लोग जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए थे और बाद में उन्हें मार्च भी निकालना पड़ा था। इस बार लोगों के बीच इस बात को लेकर भ्रम था कि उन्हें कहां और कब पहुंचना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि यदि कुछ लोग एक साथ इकट्ठा होते हैं, तो उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जा सकता है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए संघर्ष जारी रहेगा। एक अन्य प्रदर्शनकारी प्रवीण ने कहा कि अगर लोग एक ही जगह एकत्र नहीं हो पाते, तब भी वे अपनी बात रख सकते हैं। उनके मुताबिक, पोस्टर, कलाकृतियां और सार्वजनिक मौजूदगी उन मुद्दों के प्रति समर्थन जताने के तरीके हैं, जिनके लिए प्रदर्शनकारी खड़े हैं। उन्होंने कहा कि इस बार लोग चश्मे, मास्क और ढीले कपड़ों के साथ तैयारी करके आए थे और उन्होंने पिछले आंदोलन से सबक लिया था। राजधानी के अलग-अलग स्थानों पर तिरंगे और पोस्टर दिखाई दिए। इनमें “ज्ञानू, खेल खत्म!”, “नागरिकता पर हमला बंद करो” और “मेरी बिल्ली भी इस सरकार से ज्यादा जवाबदेह है” जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारियों ने ये पोस्टर और संदेश सड़कों पर पहुंचने से पहले ही तैयार किए थे। शनिवार को जंतर-मंतर तक पहुंचने में आई मुश्किलों के बावजूद पिछले आंदोलन में शामिल लोगों ने नए प्रतिभागियों की मदद करने की कोशिश की। उनके पोस्टर, डिजिटल कलाकृतियां और सुरक्षा संबंधी सुझाव इस बात को दिखाते हैं कि पहले के प्रदर्शन के अनुभवों ने इस बार की तैयारियों को प्रभावित किया। हालांकि, पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोप में एफआईआर दर्ज होने की संभावना की खबर के बीच उपलब्ध सामग्री में यह स्पष्ट नहीं है कि कितने लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।