राहुल गांधी ने कर्नाटक की महादेवपुरा सीट के आंकड़ों से बताया, कैसे हुई 'वोट चोरी'

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय चुनाव प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी और आयोग एकजुट होकर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं। राहुल ने कर्नाटक की महादेवपुरा विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह संगठित तरीके से मतों की चोरी की गई। उन्होंने यह भी दोहराया कि वोटर लिस्ट सार्वजनिक संपत्ति है, लेकिन फिर भी चुनाव आयोग विपक्षी दलों को इसकी डिजिटल प्रति देने से बचता है।

बेंगलुरु सेंट्रल में वोटों का विश्लेषण: किस सीट से शुरू हुआ शक

राहुल गांधी ने खुलासा किया कि उनकी टीम ने लोकसभा चुनाव के बाद आंतरिक विश्लेषण किया, जिसमें यह संकेत मिला कि कांग्रेस कर्नाटक में 16 सीटें जीत सकती थी, लेकिन वास्तविक परिणामों में पार्टी को केवल 9 सीटों पर जीत मिली। उन्होंने कहा कि इन 7 हारने वाली सीटों में से एक पर विशेष ध्यान दिया गया — महादेवपुरा विधानसभा, जहाँ से उन्हें संदेहास्पद वोटिंग पैटर्न मिले। उदाहरण के तौर पर राहुल ने बताया कि बेंगलुरु सेंट्रल सीट पर कांग्रेस को 6,26,208 वोट मिले, जबकि बीजेपी को 6,58,915 वोट मिले — यानी 32,707 वोटों का अंतर। खास बात यह थी कि सिर्फ महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को 1,15,586 और बीजेपी को 2,29,632 वोट मिले, यानि 114,046 वोटों का फासला।

वोट चोरी की पांच प्रमुख रणनीतियां: आंकड़ों से खोला राज़

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महादेवपुरा में लगभग 1 लाख 250 वोट संदिग्ध तरीके से डाले गए और ये वोट पांच अलग-अलग तरीकों से 'चोरी' किए गए:

डुप्लिकेट वोटर्स की संख्या 11,965 थी

फर्जी पते वाले वोटर — 40,009

एक ही पते पर अनेक वोटर — 10,452

फॉर्म 6 का दुरुपयोग — 33,692 मामले

अमान्य या संदिग्ध फोटो वाले मतदाता — 4,132

व्यक्ति विशेष से लेकर व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी

राहुल गांधी ने गुरकीरत सिंह नाम के एक मतदाता का उदाहरण देकर बताया कि यह व्यक्ति चार अलग-अलग बूथों पर वोटर लिस्ट में मौजूद था। उन्होंने कहा, यह सिर्फ एक उदाहरण है, ऐसे हजारों लोग हैं जिनके नाम अलग-अलग जगहों पर दर्ज हैं। इसके साथ ही उन्होंने आदित्य श्रीवास्तव नाम के एक अन्य व्यक्ति का जिक्र किया, जो राहुल के अनुसार महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश — तीनों राज्यों में वोटिंग कर चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि कैसे एक ही घर (जैसे हाउस नंबर 35) में 80 वोटर और हाउस नंबर 791 में 46 वोटर दर्ज हो सकते हैं।

'एक व्यक्ति, एक वोट' की अवधारणा पर संकट

राहुल गांधी ने कहा कि भारत के संविधान की आत्मा यह कहती है कि हर व्यक्ति को एक वोट का अधिकार होगा, लेकिन मौजूदा हालात में यह मूलभूत सिद्धांत खतरे में है। उन्होंने कहा, अब सवाल ये है कि क्या हर मतदाता को सही मायनों में सिर्फ एक वोट डालने का हक मिल रहा है? उन्होंने यह भी कहा कि जब ईवीएम नहीं थी, तब पूरा देश एक ही दिन वोट करता था, लेकिन अब कई चरणों में वोटिंग कराई जाती है — जिससे धांधली की आशंका और बढ़ जाती है।

महाराष्ट्र का उदाहरण: 5 महीने में 1 करोड़ नए वोटर!

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए बताया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मात्र 5 महीनों में 1 करोड़ नए वोटर जोड़े गए, जबकि आमतौर पर इतने वोटर 5 वर्षों में जोड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग ने मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट देने से इनकार कर दिया। उन्होंने दावा किया कि हमारे पास पहले कोई ठोस सबूत नहीं था, लेकिन अब जब हमने खुद छानबीन की है, तो सामने आया है कि यह एक संगठित स्तर की गड़बड़ी है, जिसमें आयोग भी शामिल है।

चुनाव आयोग और बीजेपी की सांठगांठ का आरोप

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर सीधे तौर पर आरोप लगाया कि वह विपक्षी दलों को महत्वपूर्ण डेटा तक पहुंच नहीं देता, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि जब जनता में सत्ता विरोधी लहर है, तब भी बीजेपी बार-बार जीत कैसे रही है — यह सोचने का विषय है। उन्होंने हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के नतीजों पर भी संदेह जताया और कहा कि एग्जिट पोल कुछ और बताते हैं, लेकिन परिणाम कुछ और आते हैं, जिससे भरोसे में कमी आई है।

क्या भारत का लोकतंत्र संकट में है?

राहुल गांधी के अनुसार, भारत का लोकतंत्र वोटर लिस्ट में धांधली और मतदाता पहचान की गड़बड़ी के कारण खतरे में है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की टीम ने महीनों मेहनत करके यह डाटा जुटाया है और अब वक्त है कि देश के सामने यह सच्चाई आए। उन्होंने सरकार और आयोग से जवाबदेही की मांग करते हुए कहा, यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, लोकतंत्र के भविष्य का सवाल है।