राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने थामा BJP का दामन, AAP ने उठाई राज्यसभा सदस्यता खत्म करने की मांग

आम आदमी पार्टी में सियासी हलचल तेज हो गई है और घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने दावा किया है कि पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर असंतोष पनप चुका है और उनके साथ कुल सात सांसदों ने AAP से किनारा कर लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच जब राघव चड्ढा मीडिया के सामने आए, तो उनके साथ मंच पर संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद तीनों नेता भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की और औपचारिक रूप से बीजेपी का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन सांसदों की राज्यसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग उठाई है।

राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों के तहत यह कदम उठाया है। उनके अनुसार, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी में विलय का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि सात सांसदों ने इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे राज्यसभा के सभापति को सौंपा जा चुका है। चड्ढा ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद दो अन्य सांसदों के साथ जाकर यह हस्ताक्षरित दस्तावेज व्यक्तिगत रूप से जमा किया है।
अपने फैसले को लेकर राघव चड्ढा ने भावनात्मक बयान भी दिया। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने खून-पसीने से खड़ा किया और अपनी जिंदगी के करीब 15 साल समर्पित किए, वही पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों और आदर्शों से भटक चुकी है। उनके मुताबिक, अब पार्टी का ध्यान राष्ट्रहित से हटकर निजी स्वार्थों की ओर चला गया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों से उन्हें लगातार यह महसूस हो रहा था कि वह गलत मंच पर खड़े हैं। इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने और “जनता के करीब आने” का निर्णय लिया।

संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान चड्ढा ने स्पष्ट किया कि यह कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि लंबे विचार-विमर्श के बाद उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों ने संविधान के तहत उपलब्ध प्रावधानों का उपयोग करते हुए भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है। उनका कहना था कि यह निर्णय व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक सोच का परिणाम है।

राघव चड्ढा ने यह भी दावा किया कि उनके साथ अन्य वरिष्ठ सांसद भी खड़े हैं। उन्होंने हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल का नाम लेते हुए कहा कि ये सभी नेता इस निर्णय का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, संदीप पाठक ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने हमेशा खुद को पीछे रखते हुए पार्टी और उसके नेतृत्व को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने अरविंद केजरीवाल और पार्टी संगठन को प्राथमिकता दी, लेकिन अब उन्हें लगता है कि पार्टी अपने मूल रास्ते से भटक चुकी है। उनके अनुसार, देशभर में लाखों कार्यकर्ता पार्टी के लिए समर्पित हैं, लेकिन वर्तमान दिशा उन्हें निराश कर रही है।