रसोई गैस सिलेंडर की बढ़ती लागत से राहत देने के लिए सरकार ने अब पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। एलपीजी की जगह पीएनजी कनेक्शन अपनाने वाले उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक ऑफर पेश किए गए हैं। इस पहल के तहत ग्राहकों को 500 रुपये तक की फ्री गैस देने के साथ-साथ कई कंपनियां सिक्योरिटी डिपॉजिट भी माफ कर रही हैं। सरकार का उद्देश्य उन इलाकों में, जहां पाइपलाइन सुविधा उपलब्ध है, लोगों को एलपीजी से पीएनजी की ओर तेजी से स्थानांतरित करना है।
नीति के तहत ऐसे उपभोक्ताओं को, जिनके पास पहले से पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है, तीन महीने के भीतर एलपीजी कनेक्शन छोड़कर पीएनजी अपनाने की सलाह दी गई है। इतना ही नहीं, जिन लोगों के पास दोनों तरह के कनेक्शन हैं, उन्हें एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने के लिए कहा गया है। सरकार इस बदलाव को ऊर्जा सुरक्षा और लागत नियंत्रण से जोड़कर देख रही है और इसे मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच एक अवसर के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है।
तीन महीने की समयसीमा तयपीएनजी को तेजी से बढ़ावा देने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय में मार्केटिंग और रिफाइनरी मामलों की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, गैस कंपनियां उपभोक्ताओं को पीएनजी में स्विच करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं और 500 रुपये तक की मुफ्त गैस जैसी सुविधाएं दे रही हैं। पीएनजी नेटवर्क वाले क्षेत्रों में रहने वाले एलपीजी उपभोक्ताओं को रजिस्टर्ड डाक के जरिए सूचना भेजी जाएगी, जिसमें उन्हें तीन महीने के भीतर पीएनजी कनेक्शन लेने को कहा जाएगा।
सरकार ने गैस कंपनियों को यह भी निर्देश दिया है कि आवेदन मिलने के तीन दिन के भीतर कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए। यदि किसी सोसायटी या कॉलोनी में एनओसी जैसी कोई अड़चन आती है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि प्रक्रिया में कोई देरी न हो।
लाखों उपभोक्ता कर चुके हैं बदलावदरअसल, भारत में एलपीजी का आयात पीएनजी की तुलना में अधिक होता है, जिससे लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यही वजह है कि सरकार पीएनजी को एक बेहतर विकल्प के रूप में बढ़ावा दे रही है। परिवहन लागत कम होने के कारण पीएनजी, एलपीजी के मुकाबले अधिक किफायती भी साबित होती है। हाल के समय में लगभग 2.2 लाख उपभोक्ता एलपीजी छोड़कर पीएनजी कनेक्शन अपना चुके हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली में पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क मरम्मत शुल्क को माफ कर दिया गया है और 24 घंटे काम करने की अनुमति भी दी गई है। इससे पीएनजी नेटवर्क के विस्तार में तेजी आने की उम्मीद है।
पीएनजी क्यों है बेहतर विकल्पपेट्रोलियम मंत्रालय ने पाइपलाइन विस्तार, निर्माण और संबंधित प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आवेदन प्रक्रिया को सरल किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें। पीएनजी में मीटर के जरिए गैस का बिल आता है, जिससे उपभोक्ताओं को जितनी खपत होती है, उतना ही भुगतान करना पड़ता है।
कुल मिलाकर, सरकार की यह पहल न केवल उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम कर सकती है, बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतों को संतुलित करने और आयात पर निर्भरता घटाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।