लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर संसद में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों ने अपने हस्ताक्षर किए हैं। लोकसभा सचिवालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन यानी 9 मार्च को इस अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में चर्चा कराए जाने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि पहले ही दिन इस मुद्दे को कार्यसूची में शामिल किया जा सकता है। साथ ही यह भी जानकारी सामने आई है कि जब तक इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, ओम बिरला ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को विपक्ष द्वारा दिए गए नोटिस की गहन जांच करने और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि सचिवालय स्तर पर प्रस्ताव की वैधता और प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
ओम बिरला का स्पष्ट रुख—फैसले तक आसन से दूरीलोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि विपक्षी सांसदों द्वारा उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर जब तक कोई निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वह लोकसभा की कार्यवाही में अध्यक्ष के रूप में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने यह भी दोहराया कि प्रस्ताव पर सुनवाई और उसके निपटारे तक वे अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे।
हालांकि संसद के नियमों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिसके तहत अविश्वास प्रस्ताव लंबित रहने की स्थिति में अध्यक्ष को अपने पद से हटना पड़े, लेकिन इसके बावजूद ओम बिरला ने स्वयं यह निर्णय लिया है कि वे निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस दौरान आसन से दूर रहेंगे। उनके इस कदम को संसदीय परंपराओं और नैतिक जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
अविश्वास प्रस्ताव में विपक्ष के आरोपअविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कहना है कि अध्यक्ष ने कई मौकों पर उन्हें सदन में जनहित से जुड़े अहम मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। आरोप है कि विपक्ष की आवाज को बार-बार दबाया गया, जिससे संसदीय लोकतंत्र की भावना को ठेस पहुंची।
विपक्षी दलों का दावा है कि इसी वजह से उन्हें यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। अब सभी की निगाहें 9 मार्च पर टिकी हैं, जब बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन इस अविश्वास प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया तय हो सकती है। उसी दिन यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे या नहीं।