ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली INDIA गठबंधन की महारैली में शामिल होने का ऐलान किया है। उन्होंने इस प्रदर्शन के लिए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को वापस लेने की मांग शामिल है। नेहा बोरा ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर अपनी मांगों का ऐलान किया। उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में रामलीला मैदान पहुंचने की अपील करते हुए कहा कि यह आंदोलन मतदान के अधिकारों और लोकतंत्र की पवित्रता की रक्षा के लिए है।
नेहा बोरा ने बताईं अपनी तीन प्रमुख मांगेंAISA अध्यक्ष ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया को पूरी तरह स्थगित करने और 2023 के कानून को वापस लेने की मांग को लेकर उनका आंदोलन एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचेगा। उनकी पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की है। दूसरी मांग देश में चल रही SIR प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगाने की है। तीसरी मांग मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को निरस्त करने की है। नेहा बोरा ने लोगों से अपील करते हुए कहा, ‘आप सभी लोग अपने वोटिंग के अधिकारों को लेकर लोकतंत्र की पवित्रता को बचाने के लिए 1 नवंबर को रामलीला मैदान में पहुंचें।’ उन्होंने एक्स पर वीडियो के साथ साझा किए गए संदेश में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को रोकने की मांग दोहराई।
2023 के कानून को वापस लेने की मांग क्यों?
नेहा बोरा की तीसरी मांग मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को लेकर है। इस कानून का पूरा नाम ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ है। यह कानून 28 दिसंबर 2023 को बना था और 2 फरवरी 2024 से लागू हुआ। इस कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री की ओर से नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। विपक्ष इस व्यवस्था पर सवाल उठाता रहा है। उसकी आपत्ति है कि चयन समिति में प्रधानमंत्री की ओर से नामित मंत्री को शामिल करने से सरकार का प्रभाव बढ़ता है। नेहा बोरा भी इस कानून को वापस लेने की मांग कर रही हैं।
ध्रुव राठी ने भी लोगों से रैली में पहुंचने की अपील कीनेहा बोरा के अलावा यूट्यूबर ध्रुव राठी ने भी एक नवंबर को होने वाले प्रदर्शन के समर्थन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट किया है। उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचने और इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। अपने वीडियो संदेश में ध्रुव राठी ने कहा कि एक नवंबर को दिल्ली में अगला विरोध प्रदर्शन होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार प्रदर्शन का आयोजन कांग्रेस कर रही है और इसके लिए जरूरी अनुमति भी मिल चुकी है। उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में जुटने और समूहों में रैली में आने का आह्वान किया। ध्रुव राठी ने अपने संदेश में इस आंदोलन को लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा बताया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने साथ अधिक से अधिक लोगों को लेकर आएं, ताकि प्रदर्शन में बड़ी भागीदारी हो सके।
एक नवंबर की रैली को दिल्ली पुलिस की अनुमतिदिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को होने वाली कांग्रेस की रैली के लिए दिल्ली पुलिस ने अनुमति दी है। पुलिस के मुताबिक, आयोजन के लिए 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक मैदान आरक्षित किया गया है। हालांकि, 31 अक्टूबर को पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कनॉट प्लेस-मिंटो रोड जंक्शन से रामलीला मैदान तक प्रस्तावित मार्च के संबंध में संबंधित जिला पुलिस को औपचारिक सूचना या अनुमति के लिए आवेदन नहीं मिला है। रैली के आयोजन और प्रस्तावित मार्च की अनुमति को अलग-अलग समझना जरूरी है। ऐसे में रामलीला मैदान में कार्यक्रम की अनुमति मिलने का अर्थ यह नहीं है कि वहां तक निकलने वाले हर प्रस्तावित मार्च को भी स्वतः मंजूरी मिल गई है। एक नवंबर की महारैली में विपक्षी दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के शामिल होने की संभावना है। नेहा बोरा और ध्रुव राठी की अपील से इस प्रदर्शन को लेकर छात्र संगठनों और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों के बीच भी समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है।