नीट मुद्दे पर विपक्ष में मतभेद? लोकसभा में अखिलेश यादव और केसी वेणुगोपाल के बीच दिखी तीखी नोकझोंक

नीट पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी भले ही सड़क पर एकजुट होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हों, लेकिन संसद के भीतर दोनों दलों के बीच रणनीति को लेकर मतभेद खुलकर सामने आते नजर आए। लोकसभा की कार्यवाही के दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों के मुद्दे पर चर्चा को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के बीच तीखी बहस होने की खबरें सामने आईं। हालांकि बाद में अखिलेश यादव ने इन खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी।

बुधवार दोपहर जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी सांसद नीट पेपर लीक मामले को लेकर जोरदार हंगामा कर रहे थे। समाजवादी पार्टी के सांसद भी अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान अखिलेश यादव बोलना चाहते थे, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल को बोलने की अनुमति दी। उनके वक्तव्य के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अपनी बात रखी। इसी घटनाक्रम के बाद दोनों नेताओं के बीच मतभेद की चर्चा तेज हो गई।

वेणुगोपाल से विवाद की खबरों पर क्या बोले अखिलेश?

संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी की प्राथमिक मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है, उसके बाद ही आगे की चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने केसी वेणुगोपाल के साथ विवाद की खबरों का सीधे तौर पर समर्थन नहीं किया और इशारों में इन अटकलों को खारिज कर दिया।

समाजवादी पार्टी के सूत्रों का दावा है कि सदन में अखिलेश यादव द्वारा कही गई समझौते वाली टिप्पणी कांग्रेस के लिए नहीं थी, बल्कि वह लोकसभा अध्यक्ष की कार्यवाही के तरीके पर तंज था। उनका कहना था कि छात्रों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर केवल दो दलों को बोलने का अवसर देना उचित नहीं था।
बोलने का मौका न मिलने पर जताई थी आपत्ति

लोकसभा में जब नीट पेपर लीक पर चर्चा की शुरुआत हुई तो सबसे पहले भाजपा और कांग्रेस को बोलने का अवसर दिया गया। इसे लेकर अखिलेश यादव ने आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने अध्यक्ष ओम बिरला से कहा कि क्या केवल भाजपा और कांग्रेस को ही बोलने का अधिकार है? उन्होंने सवाल किया कि क्या दोनों दलों के बीच कोई समझौता हो गया है?

अखिलेश ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल का नहीं बल्कि देश के लाखों छात्रों और युवाओं का है। ऐसे में सभी विपक्षी दलों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना था कि इस विषय को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बजाय छात्रों के भविष्य के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

रणनीति को लेकर दोनों नेताओं के बीच हुई बहस

सूत्रों के मुताबिक, सदन के भीतर हुई बातचीत के दौरान केसी वेणुगोपाल ने अखिलेश यादव से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर उनका रुख स्पष्ट करने को कहा। इस पर अखिलेश ने जवाब दिया कि इस्तीफा बाद में भी लिया जा सकता है, लेकिन फिलहाल सबसे जरूरी मुद्दा छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता और पुलिस कार्रवाई का जवाब है।

बताया जा रहा है कि इसी मुद्दे को लेकर दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक तीखी बहस हुई। हालांकि किसी भी पक्ष ने सार्वजनिक रूप से इस बातचीत को विवाद का रूप नहीं दिया।

छात्रों के मुद्दे पर सरकार को घेरा

लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि नीट पेपर लीक का मामला किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की आवाज नहीं सुनी गई तो विपक्ष उनके साथ सड़कों पर उतरकर संघर्ष करेगा।

उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की। अखिलेश ने आरोप लगाया कि विरोध कर रहे छात्रों के साथ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जिसमें कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।

पीएम आवास प्रदर्शन को लेकर भी उठाए सवाल

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी अखिलेश यादव और केसी वेणुगोपाल के बीच बातचीत जारी रही। इस दौरान वेणुगोपाल ने पूछा कि समाजवादी पार्टी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को अधिक मजबूती से क्यों नहीं उठाया, जबकि यह छात्रों की प्रमुख मांग है।

वहीं, अखिलेश यादव ने कांग्रेस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर आयोजित विरोध प्रदर्शन से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने अन्य विपक्षी दलों को भरोसे में नहीं लिया। उनका कहना था कि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता समाजवादी पार्टी की ओर से भी पहुंचे थे, इसलिए विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए था। इसके बाद अखिलेश यादव ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की।

चर्चा को लेकर सदन में बनी रही खींचतान

इससे पहले कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सदन में नीट पेपर लीक मामले पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग उठाई थी। इस पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कहा कि सरकार, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी—तीनों ही इस विषय पर चर्चा चाहते हैं, लेकिन सदन की कार्यवाही नियमों के तहत ही चलेगी। उन्होंने कहा कि हंगामे और गैलरी में खड़े होकर चर्चा संभव नहीं है। इसके बाद लगातार जारी शोर-शराबे को देखते हुए लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।