देश में कमर्शियल एलपीजी गैस की कमी ने होटल, रेस्टोरेंट और कई उद्योगों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। इसी मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात अगर ऐसे ही बने रहे तो देश में अचानक बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैल सकती है और लाखों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने कहा कि इस समय देश एक गंभीर ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। उनके मुताबिक पूरे भारत में एलपीजी गैस की भारी कमी देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल देश में गैस का उत्पादन सामान्य स्तर की तुलना में केवल लगभग 50 प्रतिशत ही हो पा रहा है। भारत में एलपीजी की कुल मांग का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस आयातित गैस का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा Strait of Hormuz के रास्ते भारत पहुंचता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण यह आपूर्ति प्रभावित हो गई है, जिसके चलते देश में एलपीजी की उपलब्धता घटकर लगभग 50–55 प्रतिशत रह गई है।
होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर सबसे ज्यादा असरकेजरीवाल ने बताया कि इस संकट का सबसे बड़ा असर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ रहा है। उनके अनुसार सरकार की ओर से आदेश जारी किया गया है कि होटल और रेस्टोरेंट को नियमित रूप से एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों से होटल और रेस्टोरेंट बड़ी मात्रा में सिलेंडर स्टोर नहीं कर सकते, इसलिए उन्हें रोजाना सप्लाई के आधार पर गैस मिलती है।
ऐसी स्थिति में जब अचानक गैस की आपूर्ति रुक गई तो इन व्यवसायों के पास दो दिन से अधिक का स्टॉक भी नहीं बचा। इसके परिणामस्वरूप कई शहरों में होटल और रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं।
केजरीवाल के मुताबिक Mumbai में करीब 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं और अगले तीन दिनों में यह संख्या 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। Tamil Nadu में लगभग 10 हजार होटल बंद होने की कगार पर हैं। वहीं Delhi और Punjab में भी हजारों होटल और रेस्टोरेंट प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस समय देश में शादियों का मौसम चल रहा है। यदि गैस संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो कई परिवारों को अपने विवाह समारोह की तारीखें आगे बढ़ानी पड़ सकती हैं। इसी तरह की चिंताजनक खबरें Bengaluru, Hyderabad, West Bengal, Chhattisgarh, Haryana और Bihar सहित कई राज्यों से सामने आ रही हैं।
1 करोड़ से ज्यादा लोगों की नौकरी पर खतराकेजरीवाल ने दावा किया कि इस संकट का असर उद्योगों पर भी तेजी से दिखाई दे रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गुजरात के मोरबी शहर को टाइल उद्योग की राजधानी माना जाता है। वहां लगभग 650 टाइल फैक्ट्रियां संचालित होती हैं।
लेकिन गैस संकट और बढ़ती लागत के कारण इनमें से करीब 170 फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं, जिससे लगभग एक लाख मजदूरों और कर्मचारियों की नौकरी चली गई है। केजरीवाल ने चेतावनी दी कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो पूरे देश में एक करोड़ से अधिक लोगों के बेरोजगार होने की आशंका पैदा हो सकती है। उनके अनुसार इतनी बड़ी संख्या में लोगों के अचानक बेरोजगार होने से देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
आखिर क्यों पैदा हुआ एलपीजी संकट?एलपीजी संकट के कारणों पर बात करते हुए केजरीवाल ने कहा कि हाल के दिनों में सरकार ने घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कीमतों में काफी बढ़ोतरी की है। इसके अलावा बाजार में कई जगह सिलेंडर ब्लैक में भी बेचे जा रहे हैं, जिससे आम लोगों और व्यवसायों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही में Israel और United States ने Iran पर हमला किया। इसके बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस जिस समुद्री मार्ग से गुजरता है, वह स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ है।
केजरीवाल के मुताबिक ईरान ने इस मार्ग पर कड़ा नियंत्रण कर दिया है और केवल अपने मित्र देशों के जहाजों को ही वहां से गुजरने की अनुमति दी जा रही है। उनके अनुसार फिलहाल Russia और China जैसे देशों के जहाज ही वहां से गुजर पा रहे हैं।
‘विदेश नीति में तटस्थता जरूरी थी’केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए केजरीवाल ने कहा कि भारत को किसी भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में खुलकर किसी पक्ष का समर्थन नहीं करना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि Narendra Modi ने इस मामले में बड़ी गलती की है।
उनका कहना था कि पिछले लगभग 75 वर्षों से भारत की विदेश नीति संतुलित और तटस्थ रही है, लेकिन हालिया घटनाओं में यह परंपरा कमजोर पड़ती दिखाई दी। केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री सीधे इजरायल और अमेरिका के साथ खड़े नजर आए, जबकि भारत को तटस्थ रुख अपनाना चाहिए था।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब युद्ध शुरू होने वाला था, उससे ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा क्यों हुई। केजरीवाल के मुताबिक ऐसी परिस्थितियों में भारत को संतुलित कूटनीति अपनाकर अपने आर्थिक और ऊर्जा हितों की रक्षा करनी चाहिए थी।